कलियुग में कब और किस अवतार में आएंगे गणपति बप्पा, जानिए गणेश पुराण की भविष्यवाणी
गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई हैं तो वहीं पर इस दौरान गणेशजी की पूजा और अर्चना का दौर जारी हैं वहीं पर कलियुग के बीच पूजा के लिए हर कोई आस्तिक हैं लेकिन कभी सोचा हैं घनघोर कलियुग बढ़ जाए तो क्या होगा। कहा जाता हैं भगवान गणेश कलियुग के अंत में धरती पर अवतार लेंगे।
- Written By: दीपिका पाल
गणेशजी लेंगे कलियुग में अवतार (सौ. सोशल मीडिया)
भगवान श्री गणेश जी के 10 दिनों के गणेशोत्सव की शुरुआत जहां पर हो गई हैं। वहीं पर इस दौरान घर और पंडालों में भगवान जी के पूजन का दौर भी चल रहा है। कलियुग में आज भी कई लोग गणेशजी की पूजा श्रद्धा से करते है, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जा रहा है अधर्म और अत्याचार भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में घनघोर की स्थिति बन जाएगी तो आगे क्या होगा भगवान आएंगे इस अत्याचार को रोकने के लिए इसे लेकर भविष्यवाणियां सामने आती हैं कि, भगवान किसी ना किसी अवतार में धरती पर आएंगे और इस अत्याचार को शांत करेंगे। भगवान श्रीगणेश के भी अब तक के युगों में अवतार हुए हैं लेकिन कलियुग में क्या अवतार होगा चलिए जानते है।
अधर्म का नाश करने आएंगे भगवान
गणेश पुराण में भगवान श्रीगणेशजी के अवतार को लेकर उल्लेख मिलता है वहीं पर पुराणों में सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में भगवान गणेश के जन्म लेने को लेकर बताया गया है। ऐसे में गणेश पुराण की भविष्यवाणी के अनुसार, जब ब्राम्हणों का ध्यान वेद-पुराण के अध्ययन से भटकने लगेगा और वे अन्य कार्य में लग जाएंगे तो धरती पर तप, जप, यज्ञ और शुभ कार्य नहीं होगें। पूजा नहीं होने पर पूरा युग नकारात्मकता से भर जाएगा ऐसे में धर्म की रखा के लिए भगवान का अवतार होगा। गणेश पुराण में बताया गया है कि, जब लोग कलयुग में धर्म के मार्ग से हटकर देवताओं के बजाय दैत्यों या आसुरी शक्तियों की उपासना करने लगेंगे तब भगवान गणेश का कलयुग अवतार प्राकट्य होगा।
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भगवान श्रीगणेश ने की ये भविष्यवाणी
गणेश पुराण के अनुसार कहा जाता हैं, भगवान श्रीगणेश जी ने कलियुग में स्वयं अपने अवतार को लेकर भविष्यवाणी की है। इसके अनुसार घनघोर कलियुग काल के अंत में भगवान गणेश का अवतार होगा, जिसका नाम धूम्रकेतु या शूपकर्ण होगा। यहां पर कलियुग में फैली बुराईयों, अधर्म और कुरीतियों को दूर करने के लिए भगवान का अवतार होगा। इसे लेकर कहा जाता है कि, भगवान के हाथ में खड्ग होगा. वे चारभुजा युक्त होकर नीले रंग के घोड़े में सवार होकर पापियों का नाश कर फिर से सतयुग का सूत्रपात करेंगे। बता दें, यह अवतार भगवान श्रीगणेश का आठवां और अंतिम अवतार होगा। इससे पहले वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लम्बोदर, विकट और विघ्नराज.धूम्रकेतु अवतार में वे भगवान विष्णु के कल्कि अवतार के साथ मिलकर मनुष्यों और धर्म की रक्षा के लिए अभिमानसुर का विनाश करेंगे।
