देव दिवाली 2024 (सौ.सोशल मीडिया)
Dev Diwali 2024: देश के बड़े व्रत त्योहारों के बीच दीवाली का त्योहार सबसे बड़े त्योहार में से एक होता हैं जिसे दीपों और रंगोली के जरिए हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ श्री गणेशजी की पूजा की जाती है। दीवाली या दीपावली के त्योहार को मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है। देव दिवाली के बारे में आपने सुना होगा जो दीवाली के 15 दिनों के बाद कार्तिक की पूर्णिमा की रात मनाई जाती है। इसका सबसे अच्छा उत्सव उत्तरप्रदेश के वाराणसी घाट पर देखने के लिए मिलता है। इस त्योहार को लेकर कई मान्यताएं और शुभ मुहूर्त है चलिए जानते है…
यहां पर देव दिवाली की बात की जाए तो, यह दिवाली के बाद 15 दिनों के बाद मनाई जाएगी यानि इस साल 2024 में देव दीपावली 15 नवंबर को मनाई जाने वाली है। इसे लेकर शुभ मुहूर्त की बात की जाए तो, द्रिकपंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर, 2024 को दोपहर 12 बजे से शुरू होकर 19 नवंबर, 2024 को शाम 5:10 बजे समाप्त होगी। पूजा (प्रार्थना) प्रदोष मुहूर्त के दौरान की जाती है। पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल देव दिवाली मुहूर्त 26 नवंबर, 2024 को शाम 5:10 बजे से 7:47 बजे तक रहेगा। बताया जाता है कि,यह त्यौहार विशेष रूप से पवित्र शहर वाराणसी में महत्वपूर्ण है, जहाँ इसे भव्यता और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
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यहां पर बात करें तो, देव दीवाली को एक तौर पर देवताओं की दीवाली के रूप में जाना जाता है जैसा कि, दिवाली भगवान राम की पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ लंका के राजा रावण को 14 साल के वनवास से हराने के बाद लौटने की याद में मनाई जाती है। वहीं पर इसके अलावा देव दीवाली को उत्सव का अंत कहा जाता है इस दिन तुलसी विवाह की रस्म पूरी की जाती है। इस दिन के बाद से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाते है।
इसकी एक और कथा के अनुसार, देव दिवाली भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। दरअसल तीन राक्षसों, विद्युन्माली, तारकक्ष और वीर्यवान को त्रिपुरासुर के नाम से जाना जाता है कहा जाता है कि, इस असुर ने कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा से सफलतापूर्वक आशीर्वाद प्राप्त किया कि वे तब तक नहीं मरेंगे जब तक कि उन्हें एक ही बाण से मार नहीं दिया जाता। भगवान से वरदान प्राप्त करने के बाद, उन्होंने पृथ्वी को नष्ट करना शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप, भगवान शिव ने त्रिपुरारी का रूप धारण किया और एक ही बाण से उन तीनों को मार गिराया, जिससे सुख, सद्भाव और आनंद बहाल हो गया।
वाराणसी में देव दीवाली (सौ.सोशल मीडिया)
देव दिवाली का अच्छा खासा उत्सव उत्तर प्रदेश के वाराणसी के अलावा ऋषिकेश, हरिद्वार और कई अन्य शहरों में देखने के लिए मिलता है। इस दिन इन जगहों का नजारा इतना खास होता है कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाए। यहां पर 24 ब्राह्मणों द्वारा 24 पवित्र मंत्रों और वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और गंगा आरती की जाती है। इस देव दिवाली के दिन शुरुआत “कार्तिक स्नान” से होती है, जहाँ भक्त सुबह-सुबह गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं। लोग इस दिन अपने घरों को रंगोली से सजाते हैं और मोमबत्तियाँ जलाते हैं।
वे अखंड रामायण का पाठ भी करते हैं, जिसके बाद भोग (प्रसाद) वितरित किया जाता है। दरअसल वाराणसी और देव दिवाली का अलग ही संबंध है जो आध्यात्मिक आभास के साथ आनंद से भर देता है। कहते हैं कि, देव दिवाली का त्यौहार आता है, तो वाराणसी शहर देवताओं के शानदार निवास के रूप में प्रकट होता है। यह शहर वास्तव में ” रोशनी का शहर ” प्रदर्शित करता है।