कौन हैं दशा माता और क्या है इस व्रत की महिमा? दशा माता व्रत की तिथि और पूजा विधि जानिए
Dasha Mata Vrat Ka Mahatva: दशा माता व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
दशा माता ((सौ. Gemini)
Dasha Mata Puja Vidhi: हिंदू धर्म में चैत्र महीने का बड़ा महत्व हैं। इस महीने कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के दिन दशा माता व्रत रखा जाता हैं। इस वर्ष यह व्रत 13 मार्च को रखा जा रहा हैं। इस दिन मां पार्वती के स्वरूप दशा माता की पूजा होती है।
इस दिन हिन्दू महिलाएं कच्चे सूत को 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठ लगाती हैं और पीपल के पेड़ की पूजा करते हुए इस डोरा को गले में बांधती हैं। कहते हैं कि ये व्रत सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। साल 2026 में दशा माता व्रत कब है, ये आप यहां से जान सकते हैं।
कब है? दशा माता व्रत 2026
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दशमी तिथि का प्रारम्भ 13 मार्च 2026 की सुबह 6 बजकर 28 मिनट से होगा और अगले दिन यानी 14 मार्च 2026 की सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर ये तिथि समाप्त होगी। ऐसे में दशा माता का व्रत 13 मार्च, दिन शुक्रवार को ही किया जाएगा।
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कैसे करें दशा माता पूजा विधि
- दशा माता के व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं।
- इसके बाद घर के पूजा स्थान या किसी पवित्र स्थान पर दशा माता की पूजा की जाती है।
- पूजा में धूप, दीप, फल, फूल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
- कई स्थानों पर महिलाएं दशा माता की कथा भी सुनती या पढ़ती हैं।
- पूजा के बाद परिवार की सुख-समृद्धि और खराब समय से मुक्ति की कामना की जाती है।
व्रत में क्यों पहना जाता है डोरा?
हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार, व्रत के दौरान डोरा पहनने का नियम होता है। इस डोरे को धागे और रेशमी डोरे से भी बनाया जा सकता है।
इसके लिए आप 10 धागों को जोड़कर एक डोरा बनाएं और उसमें 10 गांठें लगा लें। अब इस डोरे को माता के सामने रखें और आशीर्वाद लेकर पूजा के बाद पहन लें।
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ऐसा माना जाता है कि, यह डोरा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता व्रत का समापन होने के बाद दशा माता की प्रतिमा नदी में विसर्जित करनी चाहिए।
दशा माता व्रत के क्या है नियम
दशा माता व्रत हमेशा किया जाता है। इसका उद्यापन नहीं किया जाता है। यानी एक बार दशा माता व्रत शुरू करने के बाद आपको इसे हमेशा करना होता है। दशा माता का व्रत रखने वाले व्रत वाले दिन सिर्फ एक ही समय भोजन कर सकते हैं। वो भी कथा सुनने के बाद ही भोजन किया जा सकता है। भोजन में नमक की मनाही है, लेकिन गेहूं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
