घर का पूजा घर ही देगा आपको सुख-समृद्धि और खुशहाली, जानिए कहां और कैसा हो पूजा घर

Vastu Tips:पूजा स्थल घर का देवस्थान होता है जहां से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए आपका पूजा घर वास्तु के हिसाब से ऐसा होना चाहिए। जानिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
घर का पूजा घर ही देगा आपको सुख-समृद्धि और खुशहाली, जानिए कहां और कैसा हो पूजा घर
वास्तु के अनुसार कैसा होना चाहिए पूजा घर (सौ.सोशल मीडिया)
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Vastu Shastra Tips For Puja Ghar : हर हिन्दू परिवार में पूजा घर जरुर होता है। यह पवित्र स्थान घर की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि पूजा घर को सही दिशा, स्थान और नियमों के अनुसार बनाया जाए, तो घर में शांति, समृद्धि और सुख-शुभता का वास होता है।

इसलिए, वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर की दिशा, स्थान, रंग और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है, परिवारजनों को मानसिक शांति मिलती है और ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है।

इसलिए पूजा घर बनवाते समय कुछ आवश्यक बातों का जरुर ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में आइए जानते हैं पूजा घर बनवाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

वास्तु के अनुसार कैसा होना चाहिए पूजा घर:

पूजा घर की दिशा

वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर में पूजा घर के लिए सबसे शुभ एवं उत्तम दिशा उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को माना गया है। यह दिशा भगवान शिव और जल तत्व से संबंधित मानी गई है, जिससे पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मंदिर का रंग और सजावट

कहा जाता है कि, पूजा घर की दिशा के अलावा पूजा घर का रंग भी बड़ा महत्व रखता है। पूजा घर के रंग हल्के और शुभ होने चाहिए, जैसे कि सफेद, हल्का पीला, गुलाबी या क्रीम। गहरे या काले रंगों से बचना चाहिए।

पूजा घर का स्थान

वास्तु-शास्त्र के अनुसार, पूजा घर को कभी भी शौचालय, बाथरूम या सीढ़ियों के नीचे नहीं बनाना चाहिए। यह स्थान शांत, स्वच्छ और ऊर्जा से भरपूर होना चाहिए। यदि घर छोटा है, तो ड्राइंग रूम के उत्तर-पूर्व कोने को पूजा के लिए चुना जा सकता है।

मंदिर को हमेशा जमीन से कुछ ऊंचाई पर रखें और उसके नीचे किसी भी प्रकार का सामान स्टोर न करें। मंदिर की दीवार पर लकड़ी की पीठ या प्लेटफार्म लगाया जा सकता है।

मूर्तियों की व्यवस्था

मंदिर में स्थापित मूर्तियां 9 इंच से अधिक ऊंची नहीं होनी चाहिए और उन्हें दीवार से थोड़ा दूर रखें ताकि पीछे की ओर हवा का प्रवाह बना रहे। खंडित या टूटी हुई मूर्तियों को तुरंत मंदिर से हटा देना चाहिए क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा फैलाती हैं। भगवान की मूर्तियों की संख्या भी सीमित होनी चाहिए। एक ही देवता की कई मूर्तियों को एकसाथ न रखें।

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