छतिया बटा मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
ओडिशा के पुरी जिले में स्थित जगन्नाथ मंदिर जहां पर दुनिया में बेहद प्रसिद्ध है वहीं पर इन दिनों रथयात्रा का माहौल चल रहा है। रथयात्रा की शुरूआत 27 जून से हो गई है तो वहीं पर सात दिन गुंडिचा मंदिर में रहने के बाद भगवान अपने धाम वापस लौट जाएंगे। जिस तरह से जगन्नाथ मंदिर की ख्याति दुनियाभर में वैसे ही कुछ मंदिर ऐसे है जो भविष्य को लेकर संकेत दे जाते है। जैसा कि, बताया जाता है कलयुग के अंत के साथ भगवान विष्णु अपना 10वां अवतार कल्कि का लेने वाले है।
ओडिशा के भुवनेश्वर से लगभग 70 किलोमीटर दूर जाजपुर जिले के एक छोटे से गाँव छतिया में एक अनोखा मंदिर है जिसे छतिया बट मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर जिस तरह से अलग है वहीं पर इससे जुड़ी कई मान्यताएं है।
आपको भगवान जगन्नाथ जी के इस खास मंदिर के बारे में बताते चलें कि, यह मंदिर वैष्णव परंपरा और भगवान जगन्नाथ से जुड़ा हुआ है। यहां पर मां काली, श्री गणेश, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी की मूर्तियाँ विराजमान हैं। यहां पर इस छतिया बट मंदिर में, प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से अलग मूर्तियों की स्थापना की व्यवस्था की गई है। इस छतिया बट मंदिर में सुभद्रा को सबसे अंत में रखा गया है, इसे एक नए युग की शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार कलयुग में पुरी का श्री मंदिर जलमग्न हो जाएगा और भगवान जगन्नाथ पुरी के अपने मंदिर को छोड़ कर कल्कि अवतार के रूप में अपने भाई-बहन के साथ छतिया बट मंदिर में प्रकट होंगे। यह भी कहा जाता है कि यहीं से कलयुग का अंत होगा और सतयुग की शुरुआत होगी।
आपको बताते चलें कि, जिस तरह से भक्त भगवान के दर्शन मूर्ति के सामने करते है और आशीर्वाद लेते है। वैसे ही यहां भगवान की प्रतिमाओं को आईने में देख कर उनके दर्शन करने की परंपरा है। यानि भक्त भगवान के सीधे दर्शन नहीं कर सकते। इस मंदिर की अनोखी परंपरा यह भी है कि,भगवान जगन्नाथ घोड़े पर सवार हैं और उनके हाथों में तलवार भी दिखाई देती है जो दिन पर दिन लंबी होती जा रही है। कहा जाता है कि तलवार की लंबाई 12 हाथ के बराबर हो जाएगी उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा। साथ ही भगवान कल्कि भी इस दौरान अवतार लेंगे।
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यहां पर छतिया गांव को लेकर यह भी कहा गया है कि भविष्य में भगवान कल्कि छतिया गाँव में प्रकट होंगे, और यही वजह है कि छतिया का यह मंदिर इतना प्रसिद्ध और खास है। इस छतिया बट मंदिर में निर्माण चलता रहता है। माना जाता है कि मंदिर तब तक पूरा नहीं होगा जब तक भगवान कल्कि खुद उसमें विराजमान न हो जाएं। यही वजह है कि भक्त इस मंदिर में दिल खोलकर दान भी करते हैं।