मां ब्रह्मचारिणी(सौ.AI)
Maa Brahmacharini Aarti In Hindi : आज 20 मार्च को चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए समर्पित है। हिन्दू शास्त्रों में मां का वर्णन ऐसी देवी के रूप में किया गया है, जो साधना और तपस्या की प्रेरणा देने वाली बताई गई हैं। मान्यता है कि ब्रह्मचारिणी माता की सच्चे मन से पूजा करने से मनचाहा वरदान मिलता हैं।
ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त श्रृद्धा के साथ मां का पूजन करते हैं। वहीं, पूजा के बाद मां की आरती गाने का भी विधान है. हिंदू धर्म में आरती के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती हैं। ऐसे में पूजा के बाद आप यहां से ब्रह्मचारिणी माता की आरती पढ़कर गा सकते हैं।
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां,
ॐ जय ब्रह्मचारिणी मां,
अपने भक्त जनो पे,
अपने भक्त जनों पे,
करती सदा ही दया
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
ॐ जय ब्रह्मचारिणी मां
ॐ जय ब्रह्मचारिणी मां
अपने भक्तों जनो पे
अपने भक्तों जनो पे
करती सदा ही दया
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
दर्शन अनुपम मधुरम,
साद नारद रेहती,
मैया साद नारद रेहती,
शिव जी की आराधना,
शिव जी की आराधना,
मैया सदा करती,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
बाये हाथ कमंडल,
दाहिन में माला,
मैया दाहिन में माला,
रूप जो तिरीमय अद्भुत,
रूप जो तिरीमय अद्भुत,
सुख देने वाला,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
देव ऋषि मुनि साधु
गुण मां के गाते,
सब गुण मां के गाते,
शक्ति स्वरूपा मैया,
शक्ति स्वरूपा मैया,
सब तुझको ध्याते,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
संयम तप वैराग्य,
प्राणी वो पाता,
मैया प्राणी वो पाता
ब्रह्मचारिणी मां को,
ब्रह्मचारिणी मां को,
जो निशिदिनी ध्याता,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
नव दुर्गो में मैया,
दूजा तुम्हारा स्वरूप,
मैया दूजा तुम्हारा स्वरूप,
श्वेत वस्त्र धारिणी मां,
श्वेत वस्त्र धारिणी मां,
ज्योतिर्मय तेरा रूप,
ओम जय ब्रह्मचारिणी माँ।
दूजे नवरात्रे मैया,
जो तेरा व्रत धारे,
मैया जो तेरा व्रत धारे,
करके दया जग जननी,
करके दया जग जननी,
तू उसको तारे,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
शिव प्रिय शिवा ब्रम्हाणी,
हम पे दया करियो,
मैया हम पे दया करियो,
बालक है तेरे ही,
बालक है तेरे ही,
दया दृष्टि रखियो,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
शरण तिहारी आए,
ब्रम्हाणी माता,
हे ब्रम्हाणी माता,
करुणा हम पे दिखाओ,
करुणा हम पे दिखाओ,
शुभ फल की दाता,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
ब्रह्मचारिणी की आरती,
जो कोई गावे,
मैया जो कोई गावे,
कहत शिवानंद स्वामी,
कहत शिवानंद स्वामी,
मन वांछित फल पावे,
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।
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ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते
या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥।
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।