चैत्र अमावस्या(सौ. AI)
Chaitra Amavasya Kis Din Hai : सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का बड़ा महत्व है। क्योंकि यह दिन पितरों को समर्पित होता है। इस तिथि पर तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धार्मिक मत है कि, अमावस्या के दिन पितृलोक से पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं, इसलिए इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र मास की अमावस्या दो दिनों तक रहने वाली है, जिससे लोगों के बीच तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है।
अमावस्या तिथि 18 मार्च सुबह 8:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। इस कारण इसका प्रभाव दोनों दिनों में दिखाई देगा, लेकिन धार्मिक दृष्टि से 18 मार्च का दिन अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए वही दिन श्रेष्ठ माना जाता है, जब अमावस्या तिथि दोपहर के समय विद्यमान हो। इस वर्ष 18 मार्च को दोपहर में अमावस्या रहेगी, इसलिए यह दिन तर्पण के लिए अधिक शुभ है। 19 मार्च की सुबह अमावस्या समाप्त हो जाएगी, इसलिए उस दिन तर्पण का महत्व कम हो जाता है।
अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितृलोक से पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन श्रद्धा से किया गया तर्पण उन्हें संतुष्ट करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। साथ ही, पितृ दोष को शांत करने में भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।
चैत्र अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके बाद दोपहर के समय पितरों के लिए तर्पण करना अत्यंत शुभ माना गया है। भगवान शिव की पूजा, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना भी फलदायी माना जाता है। पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाना, जरूरतमंदों को भोजन कराना और तुलसी के पास संध्या दीप जलाना भी इस दिन के प्रमुख धार्मिक कार्यों में शामिल है।
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19 मार्च की सुबह अमावस्या समाप्त होते ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शुरू हो जाएगी, जो चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन होता है। इस दिन से माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा आरंभ होगी, जो 27 मार्च तक चलेगी। नवरात्रि का यह पर्व भक्तों के लिए विशेष आस्था और भक्ति का समय माना जाता है।