Bhagwan Parshuram: भगवान परशुराम के जीवन से जुड़ी ये 10 बातें, शायद आप न जानते हों
Bhagwan Parshuram History In Hindi: भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी रोचक और अद्भुत बातें हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान परशुराम (सौ.AI)
Bhagwan Parshuram Facts Hindi :भगवान विष्णु के छठवें अवतार प्रभु परशुराम का जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में परशुराम जयंती मनाई जाती है। इस साल यह जयंती 19 अप्रैल को मनाई जा रही है। धर्म शास्त्रों में भगवान विष्णु छठे अवतार परशुराम जी को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञाता माना जाता। भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों में से एक हैं। आज हम आपको भगवान परशुराम जी के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों के बारे में अपने इस लेख में बताएंगे।
Bhagwan Parshuram परशुराम जयंती का महत्व
धार्मिक दृष्टि से, परशुराम जी ने अन्याय और अधर्म के खिलाफ संघर्ष किया और सत्य व न्याय की स्थापना की। उन्हें शक्ति, साहस और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
आध्यात्मिक रूप से, उनका जीवन हमें अनुशासन, गुरु भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। वे यह सिखाते हैं कि जब भी अन्याय बढ़े, तो उसका विरोध करना आवश्यक है।
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उनकी जयंती के दिन पूजा और व्रत करने से साहस, सफलता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
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भगवान परशुराम से जुड़ी 10 रोचक बातें
- परशुराम जी का मूल नाम राम था। भगवान शिव के द्वारा इन्हें ‘परशु’ (फरसा) दिया गया था इसलिए इन्हें परशुराम कहा जाने लगा।
- भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों में से एक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परशुराम जी आज भी महेंद्रगिरि पर्वत पर तपस्या में लीन हैं।
- कर्ण, द्रोणाचार्य और भीष्म जैसे महान योद्धाओं के गुरु भी परशुराम जी ही थे। इन सभी को अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान परशुराम जी ने ही दिया था।
- भगवान परशुराम ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने फरसा के साथ ही दिव्य अस्त्र परशुराम जी को दिए थे।
- पिता की आज्ञा पाकर एक बार परशुराम जी ने माता का वध कर दिया था, पिता ने प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा तो माता को पुनर्जीवित करवा के उन्होंने कठिन परीक्षा पार कर ली।
- ब्राह्मण कुल में पैदा होने के बावजूद भी परशुराम जी के कर्म क्षत्रियों वाले थे। शास्त्र के साथ ही शस्त्रों का भी उन्हें ज्ञान था।परशुराम जी ने अधर्मी हैययवंशी क्षत्रियों से 21 बार पृथ्वी की रक्षा की थी।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलयुग में भगवान के कल्कि अवतार को शस्त्र विद्या देंगे।
परशुराम ने हमेशा अधर्म के विरुद्ध युद्ध लड़ा, उनके द्वारा कभी भी निर्दोषों पर अस्त्र-शस्त्र नहीं उठाए गए।
क्षत्रियों से जीती गई धरती को परशुराम जी ने ऋषि कश्यप को दान किया था।
