
घर में भगवान की स्थापना इस दिशा में करें, सही वास्तु ही दूर करेगा सारे संकट, धन की कमी होगी खत्म
Ghar Me Mandir Kis Disha Me Hona Chahiye : हिंदू धर्म में रोजाना पूजा-पाठ करना बहुत जरूरी माना जाता है। सदियों से ये परंपरा चली आ रही है। ऐसे में सभी हिन्दू घरों में पूजा घर जरूर होता है। कहा जाता है कि, घर का मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं होता, बल्कि यह पूरे घर की ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा स्थान का लाभ तभी होगा जब इसकी स्थापना नियमों से की जाए। सही तरीके से मंदिर की स्थापना करें, देवी देवताओं की स्थापना पर ध्यान दें। तो आइए वास्तु शास्त्र के अनुसार जानते हैं कि घर में पूजाघर में किन देवी-देवताओं की मूर्ति होनी चाहिए।
वास्तु शास्त्र में भगवान गणेश जी की मूर्ति को घर में रखने के खास नियम बताए गए हैं। मंदिर में कभी भी नाचते हुए गणेश जी की मूर्ति या प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। हमेशा गणेश जी की बैठी हुई और आशीर्वाद देती मूर्ति ही शुभ मानी जाती है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।
घर के मंदिर में यदि शिवलिंग स्थापित किया गया हो, तो उसके आकार और संख्या का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है। शास्त्रों के अनुसार, घर में स्थापित शिवलिंग का आकार अंगूठे से बड़ा नहीं होना चाहिए। शिवलिंग को बहुत जाग्रत और संवेदनशील माना जाता है, इसलिए बड़े आकार के शिवलिंग को घर के मंदिर में रखना उचित नहीं होता।
हर घर के मंदिर में आदि शक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र का होना शुभ माना जाता है। माता के विभिन्न स्वरूपों—जैसे माता काली और माता दुर्गा के तस्वीर तीन की संख्या में कभी नहीं रखने चाहिए। इन्हें तीन से कम या तीन से अधिक संख्या में रखा जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि सही संख्या में स्थापित प्रतिमाएं घर में शक्ति, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती हैं।
घर में विराजने वाले बजरंग बली की मूर्ति या चित्र हमेशा बैठी हुई मुद्रा में होना चाहिए। भगवान हनुमान की यह शांत और सौम्य मुद्रा गृहस्थ जीवन के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस रूप की पूजा से भय, नकारात्मकता और मानसिक अशांति दूर होती है।
घर के मंदिर में राम-जानकी तथा भगवान शिव के पूरे परिवार के चित्र या प्रतिमा अवश्य स्थापित करनी चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, सामंजस्य और आपसी समझ बढ़ती है और पारिवारिक मूल्यों को बल मिलता है।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मंदिर को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में स्थापित करना सबसे उत्तम माना जाता है। मंदिर का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। मंदिर को शयनकक्ष, बाथरूम या उनके पास कभी नहीं बनवाना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।






