बसंत पंचमी के दिन क्यों किया जाता है भगवान शिव का तिलक, जानिए क्या होती हैं रस्में

Lord Shiva Tilak: बसंत पंचमी के दिन भगवान शिव को तिलक लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन शिव को तिलक अर्पित करने से विद्या, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
Basant Panchami 2026
बसंत पंचमी (सौ.सोशल मीडिया)
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Basant Panchami 2026: हर साल की तरह इस साल भी बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 को पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व मां सरस्वती को समर्पित है, जिन्हें ज्ञान, वाणी और बुद्धि की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत के दिन ​यदि विधि-विधान से मां सरस्वती का पूजन किया जाए तो ज्ञान की वृद्धि होती है और स्मरण शक्ति भी प्रबल होती है।

ख़ासतौर पर इस दिन छात्रों को मां सरस्वती का पूजन अवश्य करना चाहिए। इस दिन स्कूलों और घरों में बच्चे नई किताबों, पेंसिल और कलम के साथ पूजा करते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा के अलावा एक और खास परंपरा भी निभाई जाती है? इस दिन भगवान शिव का तिलक होता है और उन्हें विशेष प्रसाद चढ़ाया जाता है।

बसंत पंचमी पर होता है भगवान शिवजी का तिलक

धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। जैसे हर शादी में तिलक का महत्व होता है, ठीक उसी तरह बसंत पंचमी के दिन शिव का ‘तिलक’ उत्सव मनाया भी जाता है। बसंत पंचमी से महादेव के विवाह की रस्में भी शुरू हो जाती हैं। इसलिए इस दिन भगवान शिवजी का तिलक उत्सव मनाया भी जाता है।

कहां मनाई जाती है 'तिलक’ उत्सव परंपरा?

बसंत पंचमी पर भगवान शिव के तिलक व विवाह से जुड़ी रस्मों की परंपरा खासकर धर्म नगरी काशी यानी वाराणसी में सदियों से चली आ रही है। इस दिन भगवान शिव को दूल्हे की तरह सजाया जाता है। उनके माथे पर हल्दी और चंदन से तिलक लगाया जाता है और उन्हें गुलाल से सजाया जाता है।

काशी नगरी के भक्त मानते हैं कि अब वैरागी शिव दूल्हा बनने की तैयारी में हैं। यह महादेव और माता पार्वती के विवाह की रस्में शुरू होने का प्रतीक है। मंदिरों में इस दिन भक्त भगवान शिव के पास जाकर उन्हें नमन करते हैं, फूल और हल्दी अर्पित करते हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस दिन भगवान शिव को केसरिया मालपुए का भोग भी लगाया जाता है। यह रस्म बसंत ऋतु के आगमन और महादेव के तिलक की खुशी में की जाती है।

काशी और अन्य जगहों में यह परंपरा बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। मंदिरों में खास समारोह होते हैं, भक्तों का तांता लगता है और हर कोई इस दिन को बेहद खुशी और श्रद्धा के साथ मनाता है।

इसके अलावा, कई जगहों पर बसंत पंचमी के दिन ही होली का डंडा भी गाड़ा जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि फाल्गुन की मस्ती और रंगों का त्योहार होली अब जल्दी ही आने वाला है।

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