Bakrid 2026 Date: कब है बकरीद 2026? यहां जानिए सही तारीख और त्योहार का महत्व
Bakrid 2026 Date Celebration: बकरीद 2026 इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे ईद-उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कुर्बानी देकर अल्लाह के प्रति आस्था और समर्पण व्यक्त किया जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
बकरीद (सौ.AI)
Bakrid 2026 Kab Hai: बकरीद इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। मुस्लिम धर्म गुरु के अनुसार, यह त्योहार पैगम्बर इब्राहिम द्वारा अपने बेटे की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 27 या 28 मई 2026 को मनाए जाने की संभावना है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में, ईद-अल-अज़हा की तारीख इस्लामी चंद्र कैलेंडर, ज़ु अल-हज्जा के 10वें दिन पर निर्भर करती है।
करीद क्यों है खास?
ईद-उल-अजहा यानी बकरीद (Bakrid 2026 Date )त्याग, आस्था और समर्पण का पर्व माना जाता है। इस दिन लोग अल्लाह के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करते हैं। दुनियाभर के मुसलमान नमाज़ अदा करते हैं, गरीबों की मदद करते हैं और इंसानियत व बराबरी का संदेश देते हैं।
बकरीद का महत्व
इस पर्व का संबंध हजरत इब्राहिम के बलिदान और समर्पण से जुड़ा है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने उनकी परीक्षा ली और अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने को कहा। तब उन्होंने अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का निश्चय किया। लेकिन अल्लाह ने उनके समर्पण को स्वीकार करते हुए बेटे की जगह एक दुम्बा प्रदान कर दिया। तभी से कुर्बानी की परंपरा शुरू मानी जाती है।
सम्बंधित ख़बरें
Tulsi Upay: क्या आप जानते हैं? योगिनी एकादशी पर तुलसी का यह छोटा सा उपाय खोल देगा बंद तक़दीर के ताले
Lord Shiva: सावन 2026: भगवान शिव को कौन-कौन से फूल अर्पित करें? जानिए किन पुष्पों से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ
बिपत्तारिणी पूजा 2026: क्यों की जाती है मां बिपत्तारिणी की आराधना? जानिए तिथि, पूजा-विधि और इसका महत्व
Sawan 2026: सावन के शुभारंभ से पहले घर में रखें ये 6 पवित्र वस्तुएं, शिव कृपा के साथ बढ़ेगी सकारात्मकता
यह भी पढ़ें- भारत में इस दिन मनाई जाएगी बकरीद, शाही इमाम ने किया ऐलान; जानें कब शुरू होगी हज यात्रा और कब है अरफा का दिन
कुर्बानी के क्या है नियम?
बकरीद के दिन दी जाने वाली कुर्बानी इस्लाम में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसे केवल एक रस्म नहीं बल्कि इबादत और सेवा का माध्यम समझा जाता है। कुर्बानी के बाद प्राप्त गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें पहला हिस्सा अपने परिवार के उपयोग के लिए रखा जाता है ताकि घर के लोग उसका लाभ ले सकें।
दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों, पड़ोसियों और करीबी लोगों में बांटा जाता है ताकि आपसी प्रेम और रिश्तों में मजबूती आए, और तीसरा हिस्सा गरीबों, जरूरतमंदों, यतीमों और समाज के कमजोर वर्गों को दिया जाता है ताकि हर व्यक्ति इस खुशी में शामिल हो सके और किसी को भी वंचित न रहना पड़े। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य समाज में समानता, सहयोग, दया और भाईचारे की भावना को बढ़ाना है, जिससे यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी एकता और इंसानियत का संदेश देता है।
