

Kala Ashtami Remedies: आज 10 अप्रैल को कालाष्टमी व्रत मनाई जा रही है। भगवान शिव के रौद्र रूप 'काल भैरव' को समर्पित कालाष्टमी व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन व्रत और विधि-विधान से काल भैरव देव की पूजा की जाती है। काल भौरव देव काशी के कोतवाल कहे जाते हैं उनको समय का स्वामी और संकटों को हरने वाला देवता भी माना जाता है।
ज्योतिषयों के अनुसार, कालाष्टमी का दिन तंत्र-मंत्र के लिए भी विशेष माना जाता है। नजर दोष से मुक्ति पाने और नकारात्मक उर्जा को दूर करने के लिए भी कालाष्टमी का दिन बहुत अच्छा माना जाता है। ज्योतिष बताते है कि, आपके घर के छोटे बच्चे को बार-बार नजर लग जाती है, तो कालाष्टमी के दिन यहां बताए गए आसान उपाय अवश्य करें।
कालाष्टमी पर रात में पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन रात 09 बजे से 11 बजे तक काल भैरव पूजा का सबसे उत्तम समय है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बच्चे को बार-बार नजर लगती है, तो कालाष्टमी के दिन सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक घर के प्रमुख द्वार पर प्रज्वलित करें। दीपक जलाने के कुछ देर बाद उसको भीतर ले जाएं और उसकी लौ से काजल बनाएं।
दीपक के लौ से बने काजल का टीका बच्चे को लगाएं। आप चाहें तो इस काजल को बार-बार बच्चे को लगाने के लिए रख सकते हैं. इससे बच्चे को बार-बार नजर नहीं लगेगी।
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बुरी नजर से बचने के लिए कालाष्टमी के दिन मंदिर जाकर काल भैरव के पैरों में काला धागा चढ़ाएं। फिर सिंदूर अर्पित करें. यही थोड़ा सा सिंदूर काले धागे पर भी लगाएं। फिर भैरव जी के मंत्र “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” का जाप करते हुए अपने दाएं हाथ की कलाई या गले में धागा बांध लें। यह काला धागा एक सुरक्षा कवच बन जाता है और आपको बुरी नजर से बचाता है।