Asha Dashami: जानिए कब रखा जाएगा आशा दशमी व्रत और क्या है इसकी चमत्कारी मान्यता
Asha Dashami Vrat Katha: आशा दशमी व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला व्रत माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
आशा दशमी व्रत (सौ.जैमिनी)
Asha Dashami Ki Chamatkari Manyata: सनातन धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाने वाला आशा दशमी व्रत बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। इस वर्ष यह व्रत 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए करती हैं।
मान्यता है कि इस दिन दसों दिशाओं की अधिष्ठात्री आशा देवियों की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। आइए जानते हैं कि आशा दशमी व्रत का महत्व क्या है, इसे कब रखा जाएगा, पूजा कैसे की जाती है और इससे जुड़े धार्मिक लाभ क्या बताए गए हैं।
कब है आशा दशमी व्रत? नोट कर लें सही तारीख और तिथि
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई 2026 को सुबह 7 बजकर 03 मिनट से होगी और इसका समापन 24 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर होगा।
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उदया तिथि के आधार पर आशा दशमी व्रत 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।
आखिर क्यों किया जाता है आशा दशमी व्रत? जानिए
इसके पीछे की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आशा दशमी का व्रत महाभारत काल से प्रचलित माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से आशा देवियां प्रसन्न होती हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
यह व्रत विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और स्थिरता की कामना के लिए किया जाता है। कई स्थानों पर इसे सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली का प्रतीक भी माना जाता है।
इस आसान विधि से करें आशा दशमी की पूजा
- इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें। - पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके वहां लाल रंग का वस्त्र बिछाएं और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- अब रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान आशा दशमी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें और आशा देवियों से परिवार के सुख, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करें।
- पूजा पूर्ण होने के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करें तथा व्रत का पारण सात्विक भोजन से करें।
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व्रत के दौरान इन नियमों का रखें विशेष ध्यान
- सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- पूरे दिन सात्विक आचरण और संयम का पालन करें।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- पूजा के समय पूरी श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखें।
- व्रत पूर्ण होने के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।
आशा दशमी व्रत से मिलने वाले शुभ फल क्या हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आशा दशमी का व्रत करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
ऐसी भी मान्यता है कि यदि किसी महिला का पति किसी कारणवश दूर चला गया हो या विदेश में रह रहा हो, तो श्रद्धापूर्वक किए गए इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसके शीघ्र वापस लौटने की कामना पूरी हो सकती है। कहा जाता है कि आशा देवियों की कृपा से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सौभाग्य बना रहता है तथा परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
आशा दशमी व्रत से जुड़े फल और मान्यताएं विभिन्न धार्मिक परंपराओं और लोकविश्वासों पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी पूजा-विधि और मान्यताओं में कुछ भिन्नता हो सकती है।
