हर साल क्यों बदल जाती है अमरनाथ यात्रा की तारीख? पहले 30 जून, इस साल 3 जुलाई, क्या है इसके पीछे की वजह?
Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा हर साल अलग अलग तारीख पर क्यों शुरू होती है जानिए हिंदू पंचांग का गणित और अमरनाथ गुफा के कठिन रास्तों से जुड़ी यह पूरी जरूरी जानकारी।
- Written By: अक्षय साहू
अमरनाथ यात्रा आज से शुरू (AI जनरेटेड फोटो)
Why Amarnath Yatra Dates Change Every Year: 3 जुलाई 2026 से अमरनाथ यात्रा शुरु हो गई है। शुक्रवार को यात्रियों का पहला जत्था जम्मू से निकलकर पहलगाम पहुंचेगा, जहां से यात्री बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पैदल यात्रा की शुरुआत करेंगे। अमरनाथ यात्रा हर साल होती है, जिसमें भारत के अलावा दूसरे देशों में रहने वाले लोग भी शामिल होते हैं।
दिलचस्प बात ये है कि हर साल यह यात्रा अलग-अलग तारीख पर शुरू होती है। 2021 में यह यात्रा 28 जून को शुरू हुई थी, तो 2023 में 1 जुलाई को। अमरनाथ यात्रा को लेकर ऐसा सालों से होता आ रहा है। ऐसे में सवाल आता है कि आखिर अमरनाथ की यात्रा हर साल अलग-अलग तारीख पर क्यों शुरू होती है?
हर साल बदलती है अमरनाथ यात्रा की तारीख (AI जनरेटेड फोटो)
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हिंदू पंचांग के मुताबिक होती है यात्रा
अमरनाथ यात्रा की तारीख हिंदू पंचांग या विक्रम संवत के मुताबिक तय होती है। इसका अंग्रेजी कैलेंडर या धार्मिक मान्यताओं से कोई लेना-देना नहीं है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, आषाढ़ मास के शुरू होने के बाद अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है, जो श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन तक चलती है। इस दौरान अमरनाथ गुफा में मौजूद शिवलिंग अपने पूर्ण आकार में ले चुका होता है।
कौन तय करता है यात्रा की तारीख?
अमरनाथ यात्रा कब और किस दिन शुरु होगी इसका निर्णय श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (SASB) द्वारा तय किया जाता है। अमरनाथ गुफा के पुजारी और पुरोहित हिंदू पंचांग के अनुसार यात्रा की तारीख बोर्ड को बताते हैं। इसके बाद बोर्ड मौसम और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा करता है और जब उन्हें लगता है कि यात्रा के लिए पुजारियों और पुरोहितों द्वारा तय तारीख में कोई बड़ी दिक्कत नहीं होगी। इसके बाद उस तारीख का ऐलान कर दिया जाता है।
अमरनाथ गुफा (AI जनरेटेड फोटो)
अमरनाथ यात्रा इस साल 3 जुलाई से शुरू हुई है, जो अब अगले 57 दिन तक जारी रहेगी और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी। पिछले साल यात्रा इससे अधिक दिन चली थी। वहीं 2024 में यात्रा के लिए सिर्फ 38 दिन ही मिले थे।
अंग्रेजी कैलेंडर से कितना अलग है हिंदू कैलेंडर?
प्रचलित अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित है, जिसमें साल के 365 दिन तय होते हैं। जबकि हिंदू कैलेंडर (पंचांग) ठीक इसके विपरीत है और यह सूर्य और चंद्रमा दोनों की गतियों की गणना करता है और इन्हीं के आधार पर ही इसकी तारीख तय होती है। हिंदू पंचांग में कई बार तिथि और मास दोपहर में भी बदल सकते है। जबकि अंग्रेजी कैलेंडर में ऐसा नहीं होता है।
अंग्रेजी कैलेंडर से अलग है हिंदू पंचांग (AI जनरेटेड फोटो)
इसरे अलावा हिंदू कैलेंडर में एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। जबकि अंग्रेजी कैलेंडर एक साल 365 दिन का होता हैइ। यानी दोनों के बीच हर साल 11 दिन का फर्क होता है। इस फर्क को दूर करने के लिए हर तीन साल में हिंदू कैलेंडर एक अतिरिक्त अधिक जोड़ दिया जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। इस बदलाव के चलते हिंदू कैलेंडर में पूर्णिमा की तिथि भी बदल जाती है। यही कारण है कि अमरनाथ यात्रा की तारीख में हर साल एक-दो दिन आगे पीछे हो जाती है।
लाखों श्रद्धालु करेंगे दर्शन
अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के रास्ते (AI जनरेटेड फोटो)
श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के मुताबिक, इस साल बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए 3.5 लाख से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। रक्षाबंधन तक चलने वाली इस यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस बार श्रद्धालुओं की संख्या डेढ़ लाख कम है। 2025 में करीब 5 लाख लोगों ने अमरनाथ की यात्रा की थी।
बेहद कठिन है अमरनाथ की यात्रा
श्रद्धालुओं के लिए कैंप लगाती है सरकार ( AI जनरेटेड फोटो)
अमरनाथ यात्रा को बेहद कठिन माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी ऊंचाई है। अमरनाथ की गुफा 5,486 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस ऊंचाई पर हवा पतली होती है और कई बार लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है। यह दो रास्तों से पहुंचा जा सकता है। जिसमें पहला है बालटाल मार्ग, इस रास्ते में यात्रियों को सिर्फ 14 किलोमीटर की चढ़ाई करनी होती है। यह अमरनाथ जाने का सबसे छोटा रास्ता है, लेकिन यह बेहद कठिन है।
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इसलिए श्रद्धालु पहलगाम वाले दूसरे रास्ते से अमरनाथ यात्रा करते हैं। इस रास्ते से श्रद्धालुओं को गुफा तक पहुंचने के लिए 36 से 48 किलोमीटर पैदल यात्रा करना पड़ती है। श्रद्धालु इसे दो से तीन दिन में पूरा करते हैं। इस दौरान सरकार श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए रास्ते में अलग-अलग व्यवस्था करती है। जैसे सोने के लिए टेंट, फ्री लंगर और मेडिकल उपचार की सुविधाएं, ताकि श्रद्धालुओं को कम से कम परेशानियों का सामना करना पड़े।
