मिसाइल से भी खतरनाक था अर्जुन का दिव्यास्त्र, जयद्रथ वध में दिखाई खास ताकत
What is Pashupatastra: आज के युग में जब भी दो देशों के बीच युद्ध होते हैं, तो मॉडर्न हथियारों का इस्तेमाल होता है। लेकिन, अगर हम भारतीय पुराणों और महाकाव्यों में कई ऐसे शक्तिशाली हथियार है।
- Written By: सिमरन सिंह
Pashupatastra Arjun (Source. Pinterest)
Guided Missile vs Divyastra: आज के युग में जब भी दो देशों के बीच युद्ध होते हैं, तो मॉडर्न हथियारों का इस्तेमाल होता है। लेकिन, अगर हम भारतीय पुराणों और महाकाव्यों में बताए गए युद्धों को देखें, तो हमें पता चलता है कि त्रेता और द्वापर युग में भी दिव्यास्त्र नाम के “स्मार्ट हथियार” थे। उनका निशाना इतना सटीक माना जाता था कि एक बार निशाना लगने के बाद वे कभी चूकते नहीं थे। महाभारत युद्ध में कई दिव्यास्त्रों का इस्तेमाल हुआ था, जिनमें से अर्जुन का इस्तेमाल किया गया पाशुपतास्त्र सबसे शक्तिशाली माना जाता है।
पाशुपतास्त्र: भगवान शिव का अमोघ अस्त्र
पाशुपतास्त्र को भगवान शिव का दिव्य हथियार माना जाता है। माना जाता है कि इसमें खुद भगवान शिव की शक्ति है। इसीलिए इसे अचूक कहा जाता था, यानी एक बार निशाना लगाने के बाद यह अपने लक्ष्य को लगें बिना वापस नहीं लौटता था। हालांकि मॉडर्न मिसाइलों को रोकने के लिए एंटी-मिसाइल सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार, पाशुपतास्त्र को रोका नहीं जा सकता था।
जयद्रथ वध में अर्जुन ने किया इसका प्रयोग
महाभारत युद्ध के दौरान जब अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुए, तब अर्जुन ने प्रतिज्ञा की कि वह सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे। अगले दिन युद्धभूमि में जब जयद्रथ सामने आया, तब अर्जुन ने अपने धनुष गांडीव पर पाशुपतास्त्र चढ़ाया। मंत्रोच्चार के साथ उन्होंने इसे जयद्रथ की ओर छोड़ा और पलभर में उसका सिर धड़ से अलग हो गया।
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टारगेट लॉक जैसी अद्भुत क्षमता
पाशुपतास्त्र की सबसे खास बात यह थी कि यह आज की मिसाइलों की तरह अपने टारगेट पर लॉक हो जाता था। एक बार निशाना लगने के बाद, यह दिव्य हथियार टारगेट का पीछा करता और तब तक नहीं रुकता जब तक वह खत्म न हो जाए। इसीलिए इसे बहुत सटीक और शक्तिशाली माना जाता था।
आवाज़ से भी तेज़
आजकल कई मिसाइलें आवाज़ की रफ़्तार से भी तेज़ चलती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पाशुपतास्त्र भी बहुत तेज़ रफ़्तार से चलता था। जब अर्जुन ने इसे चलाया, तो जयद्रथ को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कुछ ही पलों में वह मारा गया।
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निर्देशों का पालन करने की क्षमता
जयद्रथ को मारने में एक खास बात थी। कहानी के अनुसार, अगर उसका सिर ज़मीन पर गिर जाता, तो अर्जुन का सिर टुकड़ों में बिखर जाता। इसलिए, पाशुपतास्त्र चलाते समय, अर्जुन ने आदेश दिया कि जयद्रथ का सिर काटकर उसके पिता की गोद में रख दिया जाए। कहा जाता है कि दिव्य हथियार ने ठीक वैसा ही किया, सिर को दूर बैठे उसके पिता तक पहुँचा दिया। अर्जुन को यह दिव्य हथियार कैसे मिला?
पांडवों के वनवास के दौरान, अर्जुन ने भगवान शिव को खुश करने के लिए कड़ी तपस्या की। उनकी तपस्या से खुश होकर, महादेव ने उन्हें पाशुपतास्त्र दिया। इस दिव्य अस्त्र ने महाभारत युद्ध में अर्जुन को असाधारण शक्ति दी।
