महाभारत का सबसे बड़ा हीरो अर्जुन, आखिर क्यों लड़कियां देखते ही हो जाती थी मोहित?
Mahabharata Untold Stories: महाभारत की कथा तो लगभग हर भारतीय ने सुनी है 18 दिनों तक चला धर्मयुद्ध, पांडवों की जीत और अधर्म का अंत। लेकिन इस महान ग्रंथ में सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं है।
- Written By: सिमरन सिंह
Arjun and Wife (Source. Pinterest)
Mahabharata Arjuna Story: महाभारत की कथा तो लगभग हर भारतीय ने सुनी है 18 दिनों तक चला धर्मयुद्ध, पांडवों की जीत और अधर्म का अंत। लेकिन इस महान ग्रंथ में सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसे कई किस्से भी छिपे हैं, जो आमतौर पर चर्चा में नहीं आते। खासकर पांडवों से जुड़े कुछ रहस्य और अर्जुन का व्यक्तित्व, जो उन्हें सिर्फ योद्धा नहीं बल्कि महाभारत का सबसे आकर्षक नायक बनाता है।
द्रौपदी का विवाह पांच पांडवों से कैसे हुआ
द्रौपदी स्वयंवर में अर्जुन ने मछली की आंख में निशाना लगाकर विजय पाई थी। इसके बाद अर्जुन उन्हें घर ले आए। माता कुंती के एक वचन के कारण द्रौपदी का विवाह केवल अर्जुन से नहीं, बल्कि पांचों पांडवों युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव से हुआ। यह घटना महाभारत की सबसे अनोखी और चर्चित कथाओं में से एक मानी जाती है।
अर्जुन, जिनके पीछे चल पड़ती थीं महिलाएं
अर्जुन को महाभारत का सबसे सुंदर और आकर्षक योद्धा माना गया है। उनके रूप, शौर्य और शालीनता की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। पौराणिक कथाओं के जानकार देवदत्त पटनायक के अनुसार, वनवास के दौरान महिलाओं के आकर्षण से बचाने के लिए नकुल को अर्जुन के चेहरे पर धूल तक मलनी पड़ी थी, ताकि लोग उन्हें पहचान न सकें।
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चित्रांगदा से विवाह की रोचक कहानी
तीर्थ यात्रा के दौरान अर्जुन मणिपुर पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा से हुई। चित्रांगदा न केवल सुंदर थीं, बल्कि युद्धकला में भी निपुण थीं। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। राजा की शर्त थी कि अर्जुन का पुत्र मणिपुर का उत्तराधिकारी बनेगा। अर्जुन ने यह शर्त स्वीकार की और चित्रांगदा से विवाह किया। उनके पुत्र का नाम बब्रुवाहन था।
नागराजकुमारी उलूपी से संबंध
गंगा तट पर स्नान करते समय अर्जुन की भेंट नागलोक की राजकुमारी उलूपी से हुई। अर्जुन के गुणों से प्रभावित होकर उलूपी ने विवाह का प्रस्ताव रखा। अर्जुन ने सहमति दी और उनके पुत्र इरावन का जन्म हुआ, जो आगे चलकर महाभारत युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ।
सुभद्रा से प्रेम और विवाह
वनवास के दौरान अर्जुन द्वारका पहुंचे, जहां उनका प्रेम भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा से हुआ। कृष्ण की सलाह पर सुभद्रा ने अर्जुन का अपहरण कर विवाह किया। शुरुआत में बलराम नाराज हुए, लेकिन बाद में उन्होंने इस विवाह को स्वीकार कर लिया। यह महाभारत की सबसे प्रसिद्ध प्रेम कथाओं में गिनी जाती है।
उर्वशी का श्राप बना वरदान
इंद्र के दरबार में अप्सरा उर्वशी अर्जुन पर मोहित हो गईं और उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा। अर्जुन ने उन्हें मां समान मानते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया। क्रोधित होकर उर्वशी ने उन्हें एक वर्ष के लिए नपुंसक होने का श्राप दिया। यही श्राप आगे चलकर अज्ञातवास में अर्जुन के लिए वरदान बना, जब वे बृहन्नला बने।
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दुश्मन खेमे तक फैला अर्जुन का आकर्षण
कुछ कथाओं में यह भी कहा जाता है कि दुर्योधन की पत्नी भानुमति अर्जुन की प्रशंसक थीं और उनसे विवाह करना चाहती थीं। युद्ध के बाद वंश बचाने के लिए उनके विवाह की चर्चा भी मिलती है। यह किस्सा अर्जुन के उस आकर्षण को दर्शाता है, जो मित्र ही नहीं, शत्रुओं को भी प्रभावित कर गया।
