जब अर्जुन ने उठा ली थी युधिष्ठिर को मारने की तलवार, महाभारत की ये अनसुनी घटना आज भी करती है हैरान
Mahabharat की कथा हम सभी ने कभी न कभी सुनी है। इसके पात्र, युद्ध और उपदेश भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। बावजूद इसके, महाभारत से जुड़ी कई घटनाएं ऐसी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
- Written By: सिमरन सिंह
Arjun Vs Yudhisthira (Source. Pinterest)
Unheard Story of Mahabharata: महाभारत की कथा हम सभी ने कभी न कभी सुनी है। इसके पात्र, युद्ध और उपदेश भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। बावजूद इसके, महाभारत से जुड़ी कई घटनाएं ऐसी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसी ही एक चौंकाने वाली घटना का उल्लेख महाभारत के कर्ण पर्व में मिलता है, जहां हालात ऐसे बन गए थे कि अर्जुन को अपने ही बड़े भाई युधिष्ठिर का वध करने का विचार आ गया था।
युधिष्ठिर और अर्जुन का अनोखा रिश्ता
पांच पांडवों में युधिष्ठिर सबसे बड़े और धर्म के प्रतीक माने जाते थे। अर्जुन समेत सभी भाई उनका सम्मान करते थे और उनकी आज्ञा को सर्वोपरि मानते थे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या कारण था कि अर्जुन जैसा वीर अपने पूज्य बड़े भाई के विरुद्ध तलवार उठाने को मजबूर हो गया?
कर्ण पर्व की वो निर्णायक लड़ाई
महाभारत के कर्ण पर्व के अनुसार, जब कर्ण कौरव सेना का सेनापति था, तब उसका और युधिष्ठिर का भीषण युद्ध हुआ। इस युद्ध में कर्ण ने युधिष्ठिर को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल अवस्था में युधिष्ठिर अपने शिविर में विश्राम कर रहे थे। उसी समय अर्जुन और श्रीकृष्ण उनसे मिलने पहुंचे।
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युधिष्ठिर ने दोनों को एक साथ आते देखा तो उन्हें लगा कि शायद अर्जुन ने कर्ण का वध कर दिया है और यह समाचार देने आया है। लेकिन जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि कर्ण अभी जीवित है, तो वे क्रोधित हो उठे। क्रोध में उन्होंने अर्जुन को कठोर शब्द कहे और यहां तक कह दिया कि वह अपने शस्त्र किसी और को सौंप दें।
प्रतिज्ञा और संकट की घड़ी
अर्जुन पहले ही यह प्रतिज्ञा कर चुके थे कि यदि कोई उनसे उनके शस्त्र त्यागने को कहेगा, तो वे उसका वध कर देंगे। युधिष्ठिर के शब्द सुनते ही अर्जुन धर्मसंकट में पड़ गए। प्रतिज्ञा निभाने के लिए जैसे ही उन्होंने युधिष्ठिर का वध करने हेतु तलवार उठाई, उसी क्षण श्रीकृष्ण ने उन्हें रोक लिया।
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श्रीकृष्ण की बुद्धिमत्ता से टला अनर्थ
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाते हुए कहा कि,”अपने से बड़ों को यदि अपशब्द कहे जाए तो वह भी उनका वध करने जैसा ही होता है” श्रीकृष्ण की इस सलाह के अनुसार अर्जुन ने युधिष्ठिर को अपशब्द कहकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की, बिना उनका वध किए। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने दोनों भाइयों को धर्म का मार्ग दिखाया और पांडवों के बीच बड़े विवाद को समाप्त कर दिया।
महाभारत से मिलने वाला संदेश
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि क्रोध और प्रतिज्ञा से बड़ा विवेक होता है। श्रीकृष्ण की बुद्धिमत्ता ने न केवल एक भाई की जान बचाई, बल्कि पांडवों की एकता को भी कायम रखा।
Disclaimer: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है।
