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आखिर भद्रा काल में क्यों नहीं बांधी जाती है भाई की कलाई पर राखी, जानिए क्या है भद्रा

हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में ही भाइयों के कलाई में राखी बांधनी चाहिए। भद्रा मुहूर्त ने कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। आइए जानें आखिर क्यों भद्रा मुहूर्त में राखी नहीं बांधनी चाहिए।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Aug 08, 2025 | 03:27 PM

क्यों नहीं बांधनी चाहिए भद्रा काल में राखी (सौ.सोशल मीडिया)

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Rakshabandhan 2025 : कल पूरे देशभर में भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व ‘रक्षाबंधन’ मनाया जा रहा है। यह त्योहार हर साल सावन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। रक्षाबंधन का सनातन धर्म में बड़ा महत्व है। जैसा कि, आप सब जानते है कि, इस पावन तिथि पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। राखी एक ऐसा पवित्र धागा, जिसमें उनका स्नेह, आशीर्वाद और सुरक्षा की मंगलकामना बंधी होती है।

भाई भी जीवनभर उसकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं और यह रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है। यह केवल एक रिवाज नहीं, बल्कि आत्मीयता और समर्पण का भाव भी है, जो हर साल इस दिन को बेहद खास बना देता है।

हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में ही भाइयों के कलाई में राखी बांधनी चाहिए। भद्रा मुहूर्त ने कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। आइए जानें आखिर क्यों भद्रा मुहूर्त में राखी नहीं बांधनी चाहिए।

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क्यों नहीं बांधनी चाहिए भद्रा काल में राखी

सनातन धर्म में भद्रा मुहूर्त में राखी बांधने की मनाही होती है। इसका मुख्य कारण एक पौराणिक कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल में राखी बांधी थी और कुछ ही समय बाद रावण का अंत हो गया था। इसलिए यह माना जाता है कि भद्रा काल में बांधी गई राखी, रक्षा का नहीं बल्कि अनिष्ट का कारण बन सकती है।

हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, राखी कोई साधारण धागा नहीं है। यह प्रेम, सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक है। जब बहन यह धागा बांधती है, तो वह ईश्वर से अपने भाई के लिए निर्भय जीवन और शुभ भविष्य की कामना करती है। ऐसे पवित्र संकल्प के लिए शुभ समय का होना आवश्यक है।

रक्षाबंधन के दिन चंद्र देव, शिव जी और विष्णु भगवान की विशेष कृपा होती है। अगर हम भद्रा काल में राखी बांधते हैं, तो यह शुभ ऊर्जा हम तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाती। इसलिए पंचांग देखकर, भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधना शुभ और फलदायी माना गया है।

कौन हैं भद्रा

आपको बता दें, पुराणों में बताया गया है कि भद्रा देवी, शनि देव की बहन हैं। भद्रा का स्वभाव बहुत तेज और गुस्से वाला माना जाता है। कहा जाता है कि जब वह रुष्ट होती हैं, तो अच्छे कार्यों में विघ्न डाल देती हैं। इसलिए जब भद्रा काल होता है, तब शुभ और पवित्र काम करने से रोका जाता है।

क्या है भद्रा

ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, भद्रा कोई इंसान नहीं, बल्कि एक खास समय होता है। इसे ‘विष्टि करण’ भी कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह समय बहुत ही संवेदनशील और अशुभ माना जाता है।

भद्रा दिन या रात किसी भी समय आ सकती है। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, या राखी बांधने जैसे मांगलिक कार्य करनी की मनाही होती है। क्योंकि ऐसा माना गया है कि इस समय किए गए कार्यो का फल ठीक नहीं मिलता।

ये भी पढ़ें–आज है ‘वरलक्ष्मी व्रत’, रात में करें ये उपाय, माता लक्ष्मी होंगी प्रसन्न, बरसेगा धन-दौलत

ज्योतिष बताते है कि, भद्रा काल में राखी न बांधने का नियम कोई डर फैलाने की बात नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति की गहराई और समय की पवित्रता को समझाने वाला एक संकेत है। रक्षाबंधन केवल एक रेशमी धागा बांधने की रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह, आशीर्वाद और सुरक्षा के वचन का त्योहार है।

After all why rakhi is not tied on brothers wrist during bhadra period

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Published On: Aug 08, 2025 | 03:27 PM

Topics:  

  • Purnima
  • Raksha Bandhan
  • Religion

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