विवाह पंचमी’ के दिन क्यों नहीं किया जाता है विवाह, कारण जानकर चौंक जाएंगे
Ram Sita Vivah significance: हिंदू धर्म में विवाह पंचमी को बेहद शुभ माना गया है। ऐसे में आइए जानते है राम-सीता के विवाह का यह पवित्र दिन विवाह के लिए शुभ क्यों नहीं माना जाता।
- Written By: सीमा कुमारी
विवाह पंचमी के दिन क्यों नहीं करते हैं विवाह (सौ.सोशल मीडिया)
Vivah Panchami 2025: हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला ‘विवाह पंचमी’ का पावन पर्व इस बार 25 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर भगवान राम और माता सीता की पूजा-अर्चना करने का विधान होता है।
अगर धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो, विवाह पंचमी के दिन जो कोई भी व्यक्ति मां सीता और प्रभु श्री राम का विवाह कराता है, उसके जीवन में सुख और समृद्धि आती है। लेकिन यह भी मान्यता चली आ रही है कि इस दिन पर विवाह करना शुभ नहीं माना जाता। चलिए जानते हैं इसका कारण।
आखिर विवाह पंचमी के दिन क्यों नहीं करते हैं विवाह ?
हिन्दू मान्यता के अनुसार, हिंदू धर्म में प्रभु राम और माता जानकी की जोड़ी को एक आदर्श जोड़ी के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके बाद भी इस तिथि को विवाह करने के लिए एक शुभ तिथि के रूप में नहीं देखा जाता।
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इसके पीछे यह धार्मिक मान्यता चली आ रही है कि प्रभु राम और माता सीता को अपने वैवाहिक जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। 14 वर्ष का वनवास, रावण और भगवान राम का युद्ध और वनवास की समाप्ति के बाद भी माता सीता का वन में रहना, इसी के कुछ उदाहरण हैं।
इसलिए यह माना जाता है कि जो भी इस तिथि पर विवाह करता है, उसके जीवन में भी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
जानिए क्या है विवाह पंचमी का धार्मिक महत्व
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाह पंचमी का पर्व अयोध्या में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इसके साथ ही नेपाल में भी इस पर्व का उत्साह देखने को मिलता है। इस दिन पर भगवान राम और माता सीता के विवाह की भव्य झांकियां भी निकाली जाती हैं। कई साधक इस दिन पर व्रत भी करते हैं।
धार्मिक ग्रन्थों में यह वर्णन मिलता है कि विवाह पंचमी के दिन व्रत करने से साधक को सुखी वैवाहिक जीवन और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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कहा जाता है कि, इस दिन आप विधि-विधान से भगवान श्री राम और माता जानकी की पूजा करें। इसके साथ ही तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस की सिद्ध चौपाइयों का जप करें और भगवान श्रीराम व माता सीता के मंत्रों का जप करें। इससे साधक को मनचाहे फल की प्राप्ति हो सकती है।
