‘कामदा एकादशी’ का कर रहे हों व्रत, तो जान लें क्या खाएं और क्या नहीं, जानिए उपवास के नियम भी
कामदा एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या और अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत पिशाचत्व आदि दोषों का भी नाश करने वाला माना गया है। ऐसे में आइए जानते है कामदा एकादशी व्रत से जुड़े नियम के बारे में-
- Written By: सीमा कुमारी
क्या खाना चाहिए कामदा एकादशी में जानिए (सौ.सोशल मीडिया)
Kamada Ekadashi 2025: कामदा एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक पावन व्रत है। जो हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है और इस दिन उपवास के दौरान विशेष नियमों का पालन भी किया जाता है।
मान्यता है कि इन नियमों को पालन करने लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और जीवन भर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता ये भी यह है कि कामदा एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या और अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत पिशाचत्व आदि दोषों का भी नाश करने वाला माना गया है। ऐसे में आइए जानते है कामदा एकादशी व्रत से जुड़े नियम के बारे में-
क्या खाना चाहिए कामदा एकादशी में जानिए
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कामदा एकादशी पर जो भक्त उपवास रख रहे हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। वहीं, व्रती इस बात का ध्यान जरूर रख दें कि विष्णु जी की पूजा के बाद ही कुछ खाएं। इसके साथ ही प्रसाद बनाते समय पवित्रता का विशेष ध्यान दें, जिससे व्रत सफलता के साथ पूरा हो सके।
क्या नहीं खाना चाहिए कामदा एकादशी में
यदि आप कामदा एकादशी पर व्रत कर रहे हैं, तो अपने खाने का पूरा ध्यान दें, क्योंकि यह व्रत को सफल और असफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। बता दें, व्रती को एकादशी व्रत के दिन भोजन करने से बचना चाहिए।
इसके अलावा इस तिथि पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी परहेज करना चाहिए।
इसके साथ ही इस व्रत पर चावल और नमक का सेवन करने से भी बचना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखें।
क्या है कामदा एकादशी व्रत के नियम
एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहन लें और भगवान विष्णु का मनन करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद एक तांबे के लोटे में जल, फूल, अक्षत और सिंदूर डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
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फिर चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। भगवान विष्णु की मूर्ति को ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मन्त्र का उच्चारण करते हुए पंचामृत से स्नान आदि कराकर वस्त्र, चन्दन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, तिल, धूप-दीप, नैवेद्य, 1 ऋतुफल, पान, नारियल, आदि अर्पित करें।
