Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Manas Bhog Se kya Hai Maharaj Ka Matalb: Shri Premanand Ji Maharaj कहते हैं कि यह मानव जीवन केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि भगवत प्राप्ति के लिए मिला है। आज का मनुष्य चाहता है कि वह संसार में डूबा रहे और किसी संत की तपस्या उसे सुरक्षित कर दे। लेकिन सच्चा मार्ग है ईश्वर का निरंतर चिंतन और मन ही मन सेवा। जब मन संसार से हटकर प्रभु के चरणों में टिकता है, तभी वास्तविक कल्याण होता है।
अनेक लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि उनके पास धन नहीं, साधन नहीं, इसलिए वे बड़ी पूजा नहीं कर सकते। महाराज जी बताते हैं कि भगवान भाव के भूखे हैं, धन के नहीं। बिना एक पैसा खर्च किए भी आप सर्वोच्च सेवा कर सकते हैं। मन में वृंदावन की सुंदर कल्पना करें, प्रभु को उत्तम वस्त्र पहनाएं और स्वादिष्ट भोग अर्पित करें यही सच्ची मानसिक सेवा है।
महाराज ने एक कथा सुनाई, एक कंजूस व्यक्ति प्रतिदिन मन ही मन प्रभु की सेवा करता था। एक दिन ध्यान में उसे लगा कि दूध में ज्यादा शक्कर पड़ गई है और मन ही मन उसका “खर्च” सोचकर परेशान हो गया। तभी भगवान प्रकट हुए और उसे थप्पड़ मारकर बोले, “क्या इस मानसिक शक्कर के लिए आपको कुछ खर्च करना पड़ता है?” यह प्रसंग बताता है कि मानसिक सेवा भी प्रभु को प्रत्यक्ष करा सकती है। महाराज जी कहते हैं कि यदि प्रतिदिन केवल पांच मिनट भी सच्चे भाव से यह अभ्यास किया जाए, तो अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
ध्यान या भजन करते समय यदि मन में गंदे या अपवित्र विचार आएं, तो डरें नहीं। यह पाप नहीं, बल्कि अंदर की गंदगी का बाहर निकलना है। मन को शुद्ध करने के लिए:
महाराज जी के अनुसार भक्ति को मजबूत बनाने के लिए ये चार आधार जरूरी हैं:
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सच्चा नाम साधक अपने प्रारब्ध को भी जला सकता है। यात्रा या किसी कार्य से पहले पांच महान भक्तों के नाम स्मरण करने से बाधाएं दूर होती हैं। महाराज जी कहते हैं ऐसा करने वाला व्यक्ति कभी असफल नहीं होता।
जब मन में प्रभु की सच्ची प्यास जागती है, तो दुनिया की बातें, अधिक नींद और मोह अपने आप छूट जाते हैं। अहंकार त्यागें, नाम पर विश्वास रखें और गुरु की शरण में रहें यही भवसागर पार करने का एकमात्र मार्ग है।