Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Signs of God’s Grace: अक्सर साधक यह जानना चाहते हैं कि श्रीहरि या प्रियाजू की कृपा उन पर है या नहीं। Shri Premanand Ji Maharaj के अनुसार, ईश्वर की कृपा का प्रमाण धन, पद या सांसारिक सफलता नहीं, बल्कि मन और स्वभाव में आने वाला गहरा परिवर्तन है। जब भगवान किसी के हृदय में वास करते हैं, तब जीवन में आठ विशेष लक्षण स्वतः प्रकट होने लगते हैं। ये संकेत बताते हैं कि साधक वास्तव में प्रभु की अनुकंपा का पात्र बन चुका है।
ईश्वरीय कृपा का पहला संकेत है शांति। यह केवल बाहरी शोर का अभाव नहीं, बल्कि अपमान या अन्याय सहने पर भी क्षमा की भावना का जागना है। यदि विरोध होने पर क्रोध या ईर्ष्या आती है, तो यह “dirty heart” का लक्षण है। जिस पर प्रभु की कृपा होती है, उसमें स्वयं भगवान द्वारा दी गई “forgiveness strength” होती है।
जिस आत्मा को ईश्वर छू लेते हैं, उसमें दोष-दर्शन की प्रवृत्ति समाप्त हो जाती है। दूसरों में कमियां देखना भजन शक्ति को नष्ट करता है। यदि आप लोगों में अच्छाई ही देखने लगे हैं, तो समझिए आपकी साधना स्थिर हो रही है।
कृपा प्राप्त साधक में शुद्धता भीतर और बाहर दोनों होती है। बाहर से शौचाचार और स्वच्छता, भीतर से ईमानदारी, सरलता और कपटहीन हृदय। निरंतर स्मरण ही इस पवित्रता को बनाए रखता है।
जिस पर कृपा होती है, वह ऐसा कार्य नहीं करता जिससे भगवान का स्मरण टूटे। चाहे व्यवसाय हो या नौकरी, उपासक कर्म को पूरी निष्ठा से करता है, पर मन सदा प्रभु में डूबा रहता है।
जब साधक प्रार्थना करता है “सर्वे भवन्तु सुखिनः”, तब उसकी साधना हजार गुना फल देती है। क्योंकि भगवान सबमें हैं, सबके कल्याण की भावना स्वयं साधक के लिए आशीर्वाद बन जाती है।
ईश्वरीय कृपा का बड़ा संकेत है अपने लिए कुछ न चाहना। सच्चा भक्त भजन से भी केवल भजन ही चाहता है, सांसारिक सुख नहीं।
जिस पर कृपा होती है, उसके लिए सम्मान विष और अपमान अमृत समान होता है। प्रशंसा मिलने पर यदि मन डर जाए, तो समझिए भगवान आपकी रक्षा कर रहे हैं।
सभी के प्रति दया और मित्रता रखें, पर ममता किसी से नहीं। शरीर या संबंधों की आसक्ति पुनर्जन्म का कारण बनती है जैसा कि भरत जी की कथा बताती है।
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Premanand Ji Maharaj के अनुसार तीन प्रकार के सिद्ध महापुरुष होते हैं सात्त्विक/आचार्य, भ्रष्टाचारी और पिशाचाचारी। सामान्य व्यक्ति को सात्त्विक संतों की संगति करनी चाहिए और अन्य दो से दूरी बनाकर सम्मान देना चाहिए।
यदि आपके जीवन में ये आठ लक्षण उभर रहे हैं, तो समझिए भगवान स्वयं आपके साथ चल रहे हैं।