प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Rajasthan Roadways STD Gang Bust: राजस्थान पुलिस ने परिवहन विभाग और रोडवेज बसों में सक्रिय एक ऐसे खूंखार गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो दशकों से राज्य के राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था। ‘ऑपरेशन क्लीन राइड’ के तहत की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने झालावाड़ के निर्दलीय पार्षद और गिरोह के सरगना नरेंद्र सिंह राजावत समेत आठ लोगों को धर दबोचा है।
अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह रोडवेज बसों के परिचालकों (कंडक्टर्स) को बिना टिकट जारी किए यात्रियों से किराया वसूलने के लिए मजबूर करता था। इसके बदले में गिरोह परिचालकों से ‘सुरक्षा राशि’ के नाम पर रंगदारी वसूलता था। गिरोह का मुख्य काम सतर्कता जांच (Vigilance Check) की गुप्त सूचना परिचालकों तक पहुंचाना था ताकि वे पकड़े न जाएं।
शुरुआती दौर में यह गिरोह एसटीडी पीसीओ के माध्यम से निगरानी दलों की लोकेशन साझा करता था, जिसके कारण इसका नाम ‘एसटीडी गिरोह’ पड़ गया। गिरोह इतना प्रभावशाली था कि रंगदारी न देने वाले ईमानदार परिचालकों को भ्रष्टाचार के झूठे मामलों में फंसाने और नौकरी से निकलवाने की धमकी देता था।
झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने बताया कि 24 दिसंबर 2025 को मिली एक गोपनीय शिकायत के बाद इस ऑपरेशन की नींव रखी गई। पुलिस ने महीनों तक तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल (CDR) और यूपीआई लेनदेन की निगरानी की। पुलिस की एक विशेष टीम ने गुप्त रूप से बस स्टैंडों पर जासूसी कैमरों के जरिए गिरोह के सदस्यों को परिचालकों से पैसे लेते हुए रंगे हाथों कैद किया।
शनिवार को पुलिस ने राजस्थान के 12 जिलों में एक साथ छापेमारी कर गिरोह की कमर तोड़ दी। पुलिस ने सरगना राजावत के पास से ₹11,57,980 नकद, तीन कारें, जासूसी कैमरा पेन, रोडवेज पहचान पत्र और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं।
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राजस्थान पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के आतंक और मिलीभगत के कारण राज्य परिवहन निगम को कुछ रूटों पर 40 प्रतिशत तक के राजस्व की हानि हो रही थी। गिरोह प्रति परिचालक ₹50 से ₹200 और प्रति बस ₹1,200 से ₹2,500 तक की वसूली करता था। जो परिचालक बात नहीं मानता था, उसे सतर्कता विभाग में झूठी शिकायतें कर प्रताड़ित किया जाता था।
इस गिरफ्तारी के बाद राजस्थान रोडवेज के प्रशासन ने राहत की सांस ली है। पुलिस अब इस मामले में रोडवेज के अन्य उच्चाधिकारियों और सतर्कता विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच कर रही है, क्योंकि बिना विभागीय मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर सूचनाएं लीक होना संभव नहीं था।