बहरा सिस्टम! आंगन उजाड़ गया, हादसे में 2 बच्चों को खोने वाली बेसुध मां की चीखें
Jhalawar school tragedy: हादसे में एक मां ने अपने दोनो बच्चे खो दिए। उसने एक बयान में कहा कि काश भगवान बच्चों की बजाय उसे ले लेते। इस हादसे ने स्कूल भवनों की सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं उजागर की हैं।
- Written By: सौरभ शर्मा
झालावाड़ स्कूल हादसे में एक मां ने अपने दोनो बच्चे खोए (फोटो- सोशल मीडिया)
Rajasthan School Deaths: राजस्थान के झालावाड़ जिले में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। यह वीभत्स घटना पिपलोद गांव में सरकारी स्कूल की इमारत का एक हिस्सा गिर जान से हो गई, जिसमें 7 मासूम बच्चों की जान चली गई। इनमें 2 भाई-बहन भी थे, उनके घर में अब सन्नाटा पसरा है। उस मां की रो-रोकर बुरी हालत है। जान गंवाने वाले बच्चों के माता-पिता बेसुध हालत में है। हादसे में 28 बच्चे घायल भी हुए हैं। इस भयानक त्रासदी ने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया है।
हादसे में जिस मां ने बच्चों को खोया है उसकी हालात रो-रो कर बहुत खराब है, मां की चीखों से कष्टों को पहाड़ टूट रहा है। वह कहती है, ‘मैंने सब कुछ खो दिया। मेरा घर सूना हो गया। अब मेरे आंगन में खेलने वाला कोई नहीं बचा। काश भगवान मुझे उठा ले और मेरे बच्चों को छोड़ दे।’ उसकी चीखें सुनकर सबकी आंखें में आंसुओं को सैलाब उमड़ पड़ा। शनिवार की सुबह जब एसआरजी हॉस्पिटल से मृत बच्चों के शव उनके परिजनों को सौंपे गए, तो वहां मातम का माहौल था। कुछ माता-पिता अपने बच्चों के शवों से लिपटकर रो रहे थे, तो कुछ सदमे में चुपचाप बैठे थे। 5 बच्चों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर एक साथ किया गया, जबकि 2 बच्चों का अलग-अलग किया गया।
सभी बच्चों की उम्र 6 से 12 साल के बीच की
झालावाड़ स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान पायल (12), हरीश (8), प्रियंका (12), कुंदन (12), कार्तिक, मीना (12) और उनके छोटे भाई कान्हा (6) के रूप में हुई है। सबसे छोटा बच्चा सिर्फ 6 साल का था। हादसे के बाद लोग भड़क गए। अपने बच्चे को खोने वाली माँ ने स्कूल के शिक्षकों पर सवाल उठाए। उसने कहा, ‘शिक्षक बाहर क्या कर रहे थे? उन्होंने बच्चों को अकेला क्यों छोड़ दिया?’ लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और जवाबदेही की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। पुलिस को हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कांग्रेस नेता नरेश मीणा को भी हिरासत में लिया गया।
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जर्जर स्कूल भवन पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने ग्रामीण स्कूलों के जर्जर भवनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि स्कूल भवन पुराना और जर्जर था, लेकिन स्कूल स्टाफ ने इसकी शिकायत नहीं की। जिला कलेक्टर अजय सिंह ने कहा, ‘अगर हमें भवन की खराब स्थिति के बारे में पता होता, तो इसकी मरम्मत कराई जाती और हादसा टाला जा सकता था।’
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पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा
स्कूल शिक्षा मंत्री ने पीड़ित परिवारों के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। कलेक्टर ने कहा कि अगले 10 दिनों में हर परिवार को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद दी जाएगी। साथ ही, गांव में एक नया स्कूल भवन बनवाने का वादा भी किया गया है। कलेक्टर ने कहा, ‘जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी दुर्घटना दोबारा न हो। सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि अगर इमारत की हालत ठीक नहीं है तो बच्चों को अंदर न जाने दें।’ बता दें कि शुक्रवार सुबह जब बच्चे प्रार्थना के लिए स्कूल में इकट्ठा हुए थे, तभी इमारत का एक हिस्सा अचानक गिर गया। मलबे में 35 बच्चे दब गए।
