पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई…अजमेर में कॉलेज प्रिंसिपल ने नेहरू को लेकर भी किया बड़ा दावा
Ajmer Principal : अजमेर के प्रिंसपिल ने पाकिस्तान को बड़ा भाई बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के समय नेहरू का बड़े नेता के रूप में नाम ही नहीं था। गांधी, जिन्ना और अंबेडकर ही बड़े नेता थे।
- Written By: रंजन कुमार
कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखते मनोज बेहरवाल।
Ajmer Principal Statement On Pakistan : अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान गवर्नमेंट कॉलेज के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने कहा है कि 14 अगस्त 1947 को भारत और विश्व के पटल पर एक देश का नाम आया। वह पाकिस्तान था। 15 अगस्त 1947 सुबह 10 से 10:30 बजे भारत का उदय हुआ। पाकिस्तान हमसे 12 घंटे बड़ा है। पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई है।
मनोज बेहरवाल ने ये बातें ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में हुए राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में कहीं। कॉन्फ्रेंस 23 और 24 जनवरी को हुई थी।
आजादी के समय गांधी, जिन्ना और अंबेडकर ही थे बड़े नेता
मनोज बेहरवाल ने कहा कि जब आजादी मिली तो देश में तीन ही नेता थे। गांधी, जिन्ना और अंबेडकर। ध्यान रखना यहां नेहरू का नाम नहीं था। ये तीन नेता लोकप्रिय थे। विदेशी पत्रकार इंटरव्यू के लिए आए तो पहले गांधी जी के पास गए। रात 8 बज चुके थे। गांधी जी सो गए थे। रात 10 बजे जिन्ना के पास गए। वहां पता चला कि वे बाहर गए हैं। रात 12 बजे अंबेडकर के पास गए। अंबेडकर हिंदू कोड बिल की तैयारी कर रहे थे। पत्रकारों ने कहा कि आप जाग रहे हैं तो अंबेडकर ने कहा कि उन दोनों के समाज जाग चुके हैं, इसलिए वे सो गए हैं। मेरा समाज सो रहा, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है। समाज व देश एक है, यही भारतीय ज्ञान परंपरा है।
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पाकिस्तान को 45 करोड़ रुपए दिए
मुख्य मेहमान के रूप में प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने पाकिस्तान के बनने पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पहले घुट्टी पी, उसके गीत गाए गए। उसे नहलाया गया। उसका सब कुछ कराया गया, जिस कारण वह बड़ा भाई बन गया। भारत बाद में अस्तित्व में आया। पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया और सोचा कि वह बहुत कुछ हासिल कर लेगा। मगर, बाद में भारत ने उसे 45 करोड़ रुपए दिए, ताकि वह जिंदगी जी सके। वैसे, पाकिस्तान आतंकवाद में उन पैसों को बर्बाद कर दिया।
समाज को तोड़ने का काम करती थी राजनीति
बेहरवाल ने कहा कि 2014 के बाद भारतीय राजनीति और भारत के समाज के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा का कनेक्शन पहली बार हुआ है। उनका दावा है कि इससे पहले राजनीति भारत के समाज को तोड़ती थी। इससे समाज परेशान था। यह नहीं जानता था कि क्या करना है।
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कौम अपना इतिहास नहीं जानती
ईकेएस कहते हैं, लेकिन बीकेएस होना चाहिए। आई हटा देना चाहिए और बी लगाना चाहिए। थोड़ी गड़बड़ है। अंबेडकर ने कहा था कि जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, उसका पतन निश्चित है। पढ़े-लिखे लोगों का समाज से कनेक्शन कट हो चुका है। ऐसे लोगों को समाज के लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए।
3 देशों के प्रतिनिधि थे मौजूद
राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की कॉन्फ्रेंस में 7 राज्यों, राजस्थान के 20 से अधिक जिलों के प्रतिभागियों के साथ 3 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह सेमिनार भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित थी।
