

Rajasthan Government School Fevikwik Case: बांसवाड़ा जिले के बावलिया पाड़ा गांव स्थित सरकारी स्कूल में सोमवार दोपहर एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 9 वर्षीय छात्र राधेश्याम की आंखों में खेल-खेल में फेवीक्विक चला गया, जिससे उसकी दोनों पलकें मजबूती से चिपक गईं। बच्चे की गंभीर स्थिति और असहनीय दर्द को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए उदयपुर भेजा गया है।
यह विचलित करने वाली घटना सोमवार दोपहर की है जब बावलिया पाड़ा निवासी देवी सिंह का पुत्र राधेश्याम (9) अपने स्कूल परिसर में अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। जानकारी के अनुसार, खेल के दौरान अचानक किसी तरह फेवीक्विक बच्चे की आंखों में चला गया। आंखों में जलन महसूस होने पर मासूम ने घबराहट और नासमझी में अपनी आंखों को हाथों से जोर-जोर से मसल दिया। इस रगड़ के कारण फेवीक्विक का रासायनिक पदार्थ पूरी पलकों पर फैल गया और कुछ ही मिनटों के भीतर राधेश्याम की दोनों पलकें आपस में मजबूती से चिपक गईं। पलकें न खुल पाने और आंखों के भीतर रसायनों के संपर्क में आने से बच्चा दर्द से कराहने लगा। मासूम के चिल्लाने और रोने की आवाज सुनकर स्कूल का स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिजनों को सूचित किया।
परिजनों को सूचना मिलते ही पिता देवी सिंह स्कूल पहुंचे और बच्चे को लेकर तुरंत कुशलगढ़ चिकित्सालय भागे। वहां के चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद मामले को नाजुक माना और उसे जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी अस्पताल रेफर कर दिया।
बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में तैनात डॉक्टर केरवी मेहता ने बच्चे की जांच की। उन्होंने बताया कि फेवीक्विक के खतरनाक केमिकल के कारण बच्चे की पलकें इतनी मजबूती से चिपक चुकी थीं कि उन्हें सामान्य प्रक्रिया से खोलना संभव नहीं था। अस्पताल में नेत्र शल्य चिकित्सा की पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण डॉक्टरों ने किसी भी तरह की देरी को जोखिम भरा माना। बच्चे के दर्द और स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उसे तुरंत उदयपुर के उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया।
इस घटना के बाद से ही राधेश्याम के माता-पिता गहरे सदमे और चिंता में हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान परिजनों का डॉक्टरों से केवल एक ही सवाल था कि क्या उनके बच्चे की पलकें फिर से खुल पाएंगी और क्या उसकी आंखों की रोशनी पर कोई स्थायी असर तो नहीं पड़ेगा? डॉक्टर मेहता ने भी स्वीकार किया कि आंखों से जुड़ा मामला होने के कारण यह बेहद संवेदनशील है और फेवीक्विक का केमिकल आंखों के नाजुक हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है।