पंजाब में फिर आमने-सामने आए पुलिस और 'धरतीपुत्र', भयंकर झड़प में घायल हुए सात किसान, बोले- छीनी जा रही रोजी-रोटी

पंजाब के गुरदासपुर से बड़ी खबर आ रही है। यहां पुलिस और किसानों के बीच जमकर झड़प हुई। इस झड़प में सात किसान घायल हो गए। किसानों का कहना है कि एक्सप्रेसवे बनाने के नाम पर उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं।
पंजाब में फिर आमने-सामने आए पुलिस और 'धरतीपुत्र', भयंकर झड़प में घायल हुए सात किसान, बोले- छीनी जा रही रोजी-रोटी
गुरदासपुर में पुलिस-किसानों की झड़प (सोर्स- सोशल मीडिया)
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गुरदासपुर: पंजाब के गुरदासपुर से बड़ी खबर आ रही है। यहां पुलिस और किसानों के बीच जमकर झड़प हुई। इस झड़प में सात किसान घायल हो गए। किसानों का कहना है कि एक्सप्रेसवे बनाने के नाम पर उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं। उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा है।

इस दौरान किसानों ने यह भी कहा कि सरकार उनकी जमीनें लेकर उन्हें कम मुआवजा देकर चुप कराना चाहती है। और तो और जमीन लेने से पहले उन्हें कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही है। आंदोलनकारी किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

सरकार और किसानों के बीच बढ़ा तनाव

सरकार और किसानों के बीच तनाव की स्थिति गुरदासपुर की घटना ने किसानों और सरकार के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है। भूमि अधिग्रहण कानूनों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। और उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है।

क्या कहती है सरकार?

सरकार का कहना है कि विकास के लिए भूमि अधिग्रहण जरूरी है। और वे किसानों को उचित मुआवजा दे रहे हैं। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।

क्या हैं किसानों की मांगें?

किसानों की मांग है कि सरकार जमीन अधिग्रहण करने से पहले उनसे बात करे। उन्हें उचित मुआवजा दें। और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करें। वे यह भी चाहते हैं कि सरकार खेती को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए। क्योंकि खेती उनके जीवन का आधार है। अगर खेती नहीं बची तो उनका जीवन भी बर्बाद हो जाएगा। देश की ताजातरीन ख़बरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

चंडीगढ़ में घुसने की इजाजत नहीं

आपको बता दें कि 5 मार्च को चंडीगढ़ में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था। जब किसान मान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पूरे पंजाब से किसान चंडीगढ़ आने वाले थे। लेकिन पुलिस ने पहले ही किसान नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया था। किसानों के जत्थों को रास्ते में ही रोक दिया गया। कई जगहों पर किसान सड़क पर ही बैठ गए। पंजाब सरकार ने पहले ही कह दिया था कि आंदोलन की इजाजत नहीं है।

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