सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का भाजपा में शामिल (सोर्स- सोशल मीडिया)
H.S. Phoolka Join BJP: पंजाब की राजनीतिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का बुधवार दोपहर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद फुल्का की सक्रिय राजनीति में वापसी को पंजाब में बीजेपी के लिए बड़ा “बूस्ट” माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के प्रतिष्ठित वकील फुल्का की पहचान 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा के रूप में है। दशकों तक उन्होंने पीड़ितों का पक्ष मजबूती से रखा, जिसके कारण सिख समुदाय और पंजाब में उनका गहरा सम्मान है।
भाजपा में शामिल होने के बाद फुल्का ने कहा, “मैं पिछले 40 सालों से 1984 के दंगों के पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ रहा हूं, और तब से ही BJP ने मेरा साथ दिया है। मैंने उनके साथ मिलकर अपनी लड़ाई लड़ी है और बहुत सारा कानूनी काम भी किया है। मैं 2014 से 2017 तक AAP के साथ था, लेकिन BJP के साथ मेरा जुड़ाव हमेशा गहरा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि, “पंजाब में हालात बहुत खराब हैं। रंगदारी के लिए फोन आ रहे हैं, कानून-व्यवस्था बिगड़ी हुई है, नशे की समस्या है और जमीन बंजर होने की कगार पर है। सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है, इसलिए मैं पंजाब के लिए राजनीति में वापस आ रहा हूं। राजनीति में वापसी के लिए BJP से बेहतर कोई विकल्प नहीं था।”
फुल्का, जो पहले ढाका विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे, ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में राष्ट्रीय राजधानी स्थित पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से बीजेपी में प्रवेश किया।
फुल्का ने 2014 में AAP के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। उन्होंने लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से 19,709 वोटों से हार गए। इसके बाद 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने ढाका निर्वाचन क्षेत्र से शिरोमणि अकाली दल के मनप्रीत सिंह अयाली को हराकर जीत दर्ज की और बाद में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।
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2015 के बेअदबी मामलों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा कार्रवाई न किए जाने के विरोध में उन्होंने 2018 में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और AAP छोड़ दी। दिसंबर 2024 में वे कुछ समय के लिए शिरोमणि अकाली दल के साथ भी आए, जब अकाल तख्त के निर्देश पर पार्टी के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी।