

Flood in Punjab: पंजाब में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर गुरदासपुर जिले में देखा गया है। बाढ़ से जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है लेकिन हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं।
राज्य के जल संसाधन मंत्री बी. कुमार गोयल ने इस आपदा के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि अगर जून के महीने में समय रहते बांधों से पानी छोड़ा जाता, तो इस तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के अधीन BBMB ने पानी प्रबंधन में लापरवाही बरती, जिसका नतीजा पूरे राज्य को भुगतना पड़ा।
वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी की राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार की लापरवाही और तैयारियों की कमी के कारण जनता को इतना नुकसान उठाना पड़ा। कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पंजाब के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है। कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बांध प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद समय पर पानी नहीं छोड़ा गया, जो एक प्रकार की आपराधिक लापरवाही है।
राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ, सेना, बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं। अब तक 11,330 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। कई मंत्री और विधायक भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और हालात का जायजा ले रहे हैं।
जल संसाधन मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अब तक इस संकट पर कोई बयान नहीं दिया और न ही केंद्र सरकार की ओर से किसी प्रकार की सीधी सहायता मिली है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के कारण पंजाब की नदियों में जलस्तर काफी बढ़ गया है, जिससे बाढ़ की स्थिति बनी।