जेडीयू में शुरू हुआ बगावत का दौर तो इस पार्टी ने वक्फ बिल पर बदल लिया स्टैंड, राज्यसभा में वोटिंग से पहले यू-टर्न
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर लोकसभा में बुधवार को पारित हो चुका है। राज्यसभा में बिल पर चर्चा जारी है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने इस बिल का समर्थन किया है। जिसके बाद से उनकी पार्टी में बगावत का सिलसिला चल निकला है।
- Written By: अभिषेक सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर लोकसभा में बुधवार को पारित हो चुका है। राज्यसभा में बिल पर चर्चा जारी है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने इस बिल का समर्थन किया है। जिसके बाद से उनकी पार्टी में बगावत का सिलसिला चल निकला है। इससे सबक लेते हुए एक पार्टी ने राज्यसभा में बिल पर अपना स्टैंड बदल लिया है।
राज्यसभा में इस समय वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा चल रही है। इस बीच बीजेडी ने अपने सांसदों से कहा है कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और अपना फैसला लें। पार्टी की ओर से कोई व्हिप जारी नहीं किया जाएगा। इसे बड़ी पहल माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले बीजेडी ने इस विधेयक का विरोध किया था। वहीं, अब राज्यसभा में बीजेडी के सातों सांसदों को खुली छूट है- वे चाहें तो विधेयक के पक्ष में वोट कर सकते हैं या चाहें तो इसके खिलाफ भी जा सकते हैं।
क्या है इस यू-टर्न की असली वजह
बीजेडी के इस यू-टर्न को लेकर राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नवीन पटनायक की पार्टी व्हिप जारी करके बिल के विरोध में वोट करने के लिए मजबूर करती तो उनकी पार्टी में भी बगावत हो सकती है। सासंद या अन्य नेता बीजेडी का दामन भी छोड़ सकते थे। जैसा कि बिहार में जेडीयू के साथ हो रहा है।
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जेडीयू में शुरू हुई बगावत
जेडीयू के वक्फ बिल पर समर्थन देने के बाद कासिम अंसारी ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। वहीं कई अन्य नेता नीतीश कुमार के वक्फ बिल पर समर्थन का खुला विरोध भी कर रहैं है। चुनावी माहौल में इस तरह का विरोध पार्टी को भारी भी पड़ सकता है।
क्या कहता है राज्यसभा का गणित
जानकारी के लिए बता दें कि इस समय उच्च सदन में सदस्यों की संख्या 236 है। यहां भी सबसे ज्यादा संख्या बीजेपी की है। बीजेपी के कुल 98 सदस्य हैं। वहीं एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 115 है। इसमें 6 मनोनीत सदस्यों को शामिल कर लें तो यह आंकड़ा 121 पर पहुंच जाता है।
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राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए 119 सदस्यों की जरूरत होगी। ऐसे में बहुमत से 2 सदस्य ज्यादा हैं। अब अगर हम यह मान लें कि बीजद के सभी सातों सांसद इस बिल के पक्ष में वोट करेंगे तो सरकार का बहुमत और मजबूत हो जाएगा। उस स्थिति में सरकार के पक्ष में आंकड़ा 128 तक पहुंच जाएगा। अगर ये सभी समर्थन नहीं भी करते हैं तो भी सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन बीजद के इतिहास के अनुसार उसने विपक्ष से अलग हटकर मोदी सरकार के कई महत्वपूर्ण बिलों के समर्थन में वोट किया है।
बीजेडी ने जारी किया आधिकारिक बयान
पार्टी के तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बीजेडी हमेशा से धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता के सिद्धांतों में विश्वास करती रही है। हम वक्फ बिल को लेकर अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा व्यक्त किए जा रहे विचारों का सम्मान करते हैं। सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने सांसदों से अपेक्षा की है कि वे अपने मताधिकार का पूरी जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करेंगे, न्याय, शांति और सभी समुदायों के अधिकारों का ध्यान रखेंगे। पार्टी की ओर से कोई व्हिप जारी नहीं किया गया है।
