Birthday Special: आर्मी बैकग्राउंड से यूपी की ‘माननीय’ तक, जानिए डिंपल यादव के जीवन के कुछ अनसुने किस्से
Dimple Yadav Birthday Special: डिंपल यादव का जन्म सैन्य परिवार में हुआ, वे मैनपुरी से सांसद हैं। अखिलेश यादव से विवाह के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपनी शालीनता व संघर्ष से एक नई पहचान बनाई।
- Written By: प्रिया सिंह
डिंपल यादव जन्मदिन विशेष (सोर्स-डिज़ाइन)
Dimple Yadav Life and Political Career Highlights: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब ‘सादगी’ और ‘शालीनता’ का जिक्र होता है, तो डिंपल यादव का नाम सबसे पहले आता है। एक सैन्य अधिकारी की बेटी से लेकर राज्य की ‘माननीय’ सांसद बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आर्मी बैकग्राउंड के अनुशासन और राजनीतिक गलियारों की सक्रियता के बीच डिंपल ने खुद को एक कुशल राजनेता के रूप में स्थापित किया है। आज उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनके जीवन के दिलचस्प पहलू।
सेना का अनुशासन और सादगी भरा बचपन
डिंपल यादव का जन्म 15 जनवरी 1978 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उनके पिता आर. सी. रावत भारतीय सेना में कर्नल थे। यही कारण है कि डिंपल का बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता। सेना के माहौल ने उन्हें न केवल अनुशासन सिखाया, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में शांत रहना भी सिखाया। उन्होंने अपनी पढ़ाई पुणे, भटिंडा और लखनऊ से पूरी की। लखनऊ विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक करने वाली डिंपल ने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन राजनीति का हिस्सा बनेंगी।
अखिलेश यादव से पहली मुलाकात और प्रेम कहानी
डिंपल और अखिलेश यादव की प्रेम कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है। दोनों की मुलाकात उस वक्त हुई थी जब अखिलेश अपनी पढ़ाई पूरी कर ऑस्ट्रेलिया से लौटे थे। एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई यह मुलाकात जल्द ही प्यार में बदल गई। हालांकि, एक तरफ आर्मी बैकग्राउंड था और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश का सबसे रसूखदार राजनीतिक परिवार। शुरुआत में परिवार को मनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अंततः 24 नवंबर 1999 को दोनों परिणय सूत्र में बंध गए।
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अखिलेश यादव और डिंपल यादव (सोर्स-सोशल मीडिया)
राजनीति में ‘अचानक’ एंट्री और शुरुआती संघर्ष
डिंपल यादव की राजनीति में एंट्री योजनाबद्ध नहीं थी। साल 2009 में फिरोजाबाद उपचुनाव के दौरान उन्होंने अपना पहला कदम रखा, लेकिन वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने डिंपल को कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें जमीनी राजनीति समझने का मौका दिया। 2012 में जब अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद संभाला और कन्नौज सीट छोड़ी, तब डिंपल वहां से निर्विरोध चुनी गईं। यह उनके राजनीतिक करियर का एक ऐतिहासिक मोड़ था।
संसद में गूंजी ‘शालीन’ आवाज
डिंपल यादव की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है जो शोर-शराबे के बजाय तर्कों के साथ बात करती हैं। संसद में उन्होंने महिला सुरक्षा, पोषण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर प्रखरता से आवाज उठाई है। साल 2022 के मैनपुरी उपचुनाव में उनकी रिकॉर्ड जीत ने यह साबित कर दिया कि वह केवल अखिलेश यादव की पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र जननेता के रूप में स्थापित हो चुकी हैं।
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राजनीति के साथ परिवार का संतुलन
डिंपल और अखिलेश यादव और बच्चे अदिति, टीना और अर्जुन (सोर्स-सोशल मीडिया)
डिंपल यादव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह राजनीति की व्यस्तता के बीच अपने बच्चों (अदिति, टीना और अर्जुन) और परिवार के लिए हमेशा समय निकालती हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें ‘भाभी जी’ के नाम से सम्मान मिलता है। उनकी शालीनता और सौम्य व्यवहार ही उन्हें भीड़ से अलग बनाता है।
