

Chandrima Bhattacharya On TMC Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और राज्य की पूर्व वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर बागी गुट का दामन थाम लिया है। उनके इस फैसले को ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इस्तीफे के तुरंत बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य विधानसभा पहुंचीं और निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी विधायकों की बैठक में शामिल हुईं।
इस दौरान उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा था कि वित्त राज्य मंत्री रहते हुए भी उन्हें राज्य के बजट निर्माण की प्रक्रिया में कभी शामिल नहीं किया गया और बजट भाषण की जानकारी भी उन्हें पेश होने से कुछ घंटे पहले ही दी जाती थी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के प्रति वफादारी के कारण उन्होंने अब तक इन बातों का खुलासा नहीं किया था, लेकिन अब उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए जाने के बाद उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। वहीं टीएमसी ने उनके फैसले को विश्वासघात करार दिया है।
विधायकों के बागी खेमे के साथ बैठक के बारे में पूछे जाने पर हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पराजित हुईं भट्टाचार्य ने कहा कि अंततः सभी को समय की आवश्यकता के अनुसार यात्रा करनी पड़ती है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान उन्होंने एक सनसनीखेज आरोप लगाया कि वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पश्चिम बंगाल विधानसभा में हर साल राज्य बजट पेश करने के बावजूद, बजट तैयार करने में उनसे कभी सलाह नहीं ली गई और न ही उन्हें इसमें शामिल किया गया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि बजट पेश करने से एक दिन पहले तक मुझे भी यह नहीं पता था कि बजट भाषण में क्या होगा। विधानसभा में पेश करने से कुछ घंटे पहले ही मुझे बजट की जानकारी दी गई। मैं ममता बनर्जी के प्रति वफादार थी, इसलिए मैंने कभी इसका खुलासा नहीं किया। अब चूंकि मेरी वफादारी पर सवाल उठ रहे हैं।
ममता बनर्जी मुझे शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर कब्जे के लिए जिम्मेदार ठहरा रही हैं, इसलिए मेरे पास पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। उन्होंने यह भी कहा कि वह और भी खुलासा कर सकती थीं, लेकिन राज्य की पूर्व सदस्य होने के नाते उन्होंने गोपनीयता की शपथ ली थी, इसलिए वह जानबूझकर ऐसा करने से बच रही थीं।
तो वहीं इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि अगर कोई गद्दारों से हाथ मिलाने का फैसला करता है, तो उस फैसले पर कुछ कहने की जरूरत नहीं रह जाती। घोष ने आगे सवाल करते हुए कहा कि पूर्व सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली कैबिनेट में चंद्रिमा भट्टाचार्य को अधिकतम और सबसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो आवंटित किए गए थे। क्या उन्हें तब गर्व नहीं हुआ था? पार्टी की हार के बाद उन्होंने अब पार्टी क्यों छोड़ी।