सम्राट चौधरी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
BJP Expansion: बिहार में सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद यह देश का 16वां राज्य होगा। जहां पर भाजपा का अपना मुख्यमंत्री बनेगा। जबकि एनडीए के नेतृत्व वाला यह देश का 21वां राज्य हो जाएगा। बिहार में पिछले दो दशक से भी अधिक समय से भाजपा छोटे भाई की भूमिका में रही थी। लेकिन अब वह राज्य में बड़ा भाई बन गई है। लेकिन यह पहला राज्य नहीं है। जहां पर भाजपा ने अपनी भूमिका को छोटे भाई से बदलकर बड़ा भाई कर दिया है।
इससे पहले कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडू से लेकर पंजाब तक भाजपा ने यह कार्य किया है। इन राज्यों में किसी समय भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में रहे दल अब केवल वहां पर नाम के लिए रह गए हैं। उनका अपना वर्चस्व खत्म हो गया है और वे अपनी पहचान के लिए संघर्ष करते हुए दिख रहे हैं। जबकि इन सभी राज्यों में भाजपा बम-बम कर अपना परचम लहराती हुई दिख रही है।
भाजपा (BJP) ने यह प्रयोग सबसे पहले महाराष्ट्र में किया। जहां पर मुख्यमंत्री पद को लेकर उसने अपने सबसे पुराने साथी शिवसेना के साथ गठबंधन खत्म कर लिया। इसके बाद राज्य में दलों को तोड़ने, असली नकली पार्टी होने सहित कई तरह के राजनीतिक घटनाक्रम चले। जिसमें शिवसेना और एनसीपी दो फाड़ हो गई।
दोनों की ताकत बंट गई। जबकि भाजपा यहां पर सबसे मजबूत पार्टी बन गई और उसने छोटे भाई की भूमिका से अपने को न केवल बड़ा बल्कि मजबूत बड़ा भाई की भूमिका में स्थापित कर लिया। इस समय महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और सभी विपक्षी दलों का मुख्य मुकाबला उसी के साथ है।
16 राज्यों में भाजपा के CM: अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, गौवा, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड
05 राज्यों में सहयोगी दलों के सीएम: आंध्र प्रदेश, मेघालय नागालैंड, पददुचेरी, सिक्किम
04 दूसरे दलों के नेताओं को भाजपा ने सीएम बनाया: प्रेमा खांडू, माणिक साहू, हिमंत बिस्वा सरमा, सम्राट चौधरी
इस समय एचडी देवगौड़ा के गृह जिला के अलावा किसी भी स्थान पर जेडीएस का अपनी कोई बड़ी ताकत नहीं है। जबकि यहां पर मुख्य मुकाबला में भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे के सामने खड़ी होती है। भाजपा (BJP) ने तेलंगाना में एक समय बीआरएस से हाथ मिलाया, लेकिन बीआरएस सिकुड़ती चली गई, जबकि यहां पर भाजपा सरकार बनाने की दौड़ में पहुंच गई। भाजपा मुकाबले में आ गई, जबकि यहां पर कांग्रेस के मुख्य बीआरएस अपनी उपस्थिति दर्ज कराने तक के लिए संघर्ष करती दिख रही है।
यह माना जा रहा है कि बिहार में अगले एक से दो साल के अंदर जेडीयू में टूट हो सकती है। इस दौरान 80 प्रतिशत जेडीयू के भाजपा और करीब 15 प्रतिशत के राजद और शेष 5 प्रतिशत के अन्य दलों में जाने की संभावना जाहिर की जा रही है।
यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा (BJP) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का समर्थन भी भाजपा को मिल सकता है। एक वरिष्ठ जेडीयू विधायक ने कहा कि भाजपा में पहले से ही कई नेता है।
ऐसे में जेडीयू नेताओं के वहां जाने के बाद उनकी क्या स्थिति होगी, यह समझा जा सकता है। लेकिन यह तय है कि जेडीयू अब बहुत दिन तक नहीं रहेगी। यह संभव है कि आमने-सामने की लड़ाई होने पर राजद को लाभ का आकलन देखते हुए भाजपा एक छदम जेडीयू बनाए रखे।
बिहार में अब नीतीश युग के साथ ही जेडीयू युग भी खत्म होगा। यह देखना रोचक होगा कि क्या चिराग पासवान से लेकर वे सभी नेता जो राज्य में सीएम बनना चाहते है। वह आने वाले दिनों में क्या कदम उठाते हैं। इसकी वजह यह है कि अब राज्य में एनडीए के अदंर भाजपा से सीएम उम्मीदवार सामने आता रहेगा।
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आंध्र प्रदेश में भाजपा (BJP) ने परोक्ष रूप से जगन मोहन रेड्डी से हाथ मिलाया, लेकिन उसके बाद अपनी उपस्थिति के विस्तार के लिए उसने रेड्डी को झटका देते हुए टीडीपी के साथ करार कर लिया, लेकिन यहां भी उसने अपने विस्तार का कार्य शुरू कर दिया है। पंजाब में किसान कानूनों के दौरान अकाली दल ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। यह गठबंधन जारी रहता तो भाजपा आगे भी छोटा भाई रहती, लेकिन अब राज्य की राजनीति में अकाली दल गायब हो गया है। जबकि भाजपा का विस्तार हो रहा है।
भाजपा ने हरियाणा में भी इनेलो के साथ गठबंधन किया, इसके बाद उसके ही एक अंग जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया, लेकिन यह दोनों ही दल आज अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जबकि भाजपा (BJP) यहां पर दोबारा से सत्ता पर काबिज होने में सफल रही है, ओडिशा में भी भाजपा ने पहले बीजद संग गठबंधन किया था, लेकिन अंत में उसने यहां भी अपने छोटे भाई की भूमिका को बदल कर बीजू जनता दल से नाता तोड़ लिया।