

Pashupati Paras Hospitalized: पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशुपति कुमार पारस की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें पटना के कंकड़बाग स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
जैसे ही यह खबर चिराग पासवान को मिली, वह तुरंत अपने चाचा से मिलने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पारस का हालचाल जाना और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। खास बात यह रही कि लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद चाचा-भतीजे की यह मुलाकात चर्चा का केंद्र बन गई।
पशुपति पारस के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही उनके समर्थकों का तांता लग गया। कई नेता और कार्यकर्ता उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इसी बीच चिराग पासवान भी पटना पहुंचे और सीधे अस्पताल जाकर अपने चाचा से मुलाकात की। मुलाकात के बाद चिराग ने कहा कि पारस उनके लिए पिता समान हैं और वह एक राजनेता के तौर पर नहीं बल्कि एक बेटे के नाते उनसे मिलने आए हैं। उनका यह बयान सियासी गलियारों में काफी चर्चा में है। इसके अलावा चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट भी किया और लिखा कि मेरे अभिभावक, चाचा जी पशुपति कुमार पारस आज सुबह से अस्वस्थ हैं। पटना में अस्पताल जाकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा समुचित इलाज हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह शीघ्र स्वस्थ हो। इसके साथ ही उन्होंने फोटो भी शेयर की जिसमें वह अपने चाचा को गले लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी की विरासत को लेकर चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच विवाद गहरा गया था। इस टकराव के चलते लोक जनशक्ति पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। एक ओर चिराग के नेतृत्व में लोजपा (रामविलास) बनी, तो दूसरी ओर पारस के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) का गठन हुआ। उस समय पारस ने पार्टी के अधिकांश सांसदों का समर्थन हासिल कर लिया था जिससे चिराग अलग-थलग पड़ गए थे।
राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान पारस केंद्र सरकार में मंत्री भी बने रहे लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हालात बदल गए। चिराग पासवान की एनडीए में वापसी हुई और पारस को किनारे कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पारस ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस बीच पारस की तबीयत बिगड़ने और चिराग के उनसे मिलने पहुंचने की घटना को कई लोग रिश्तों में नरमी के संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं।