सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए अरविंद केजरीवाल और सुनिता केजरीवाल (सोर्स- सोशल मीडिया) 
राजनीति

सुंदरकांड पाठ बना सियासी मुद्दा, भाजपा बोली- आस्था नहीं, वोट की राजनीति कर रहे केजरीवाल

Delhi Politics: भाजपा ने सुंदरकांड पाठ कार्यक्रम को लेकर अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनका राजनीतिक दांव विफल रहा और जनता ने 'अवसरवादी भक्ति' को स्वीकार नहीं किया।

करुणा नंद शाहवाल

BJP Harsh Malhotra On Arvind Kejriwal Sunderkand Path: दिल्ली में आयोजित श्री सुंदरकांड पाठ को लेकर भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच सियासी जुबानी जंग तेज हो गई है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा आयोजित सुंदरकांड पाठ कार्यक्रम पूरी तरह विफल रहा और इसमें अपेक्षित संख्या में श्रद्धालु शामिल नहीं हुए। भाजपा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने के लिए बसों की व्यवस्था की थी, इसके बावजूद केवल 500 से 600 लोग ही पहुंचे।

भाजपा ने इसे केजरीवाल की "अवसरवादी भक्ति" बताते हुए कहा कि जनता के साथ-साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी इस आयोजन से दूरी बनाए रखी। भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी समय में हिंदू मतदाताओं को साधने के उद्देश्य से सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक आयोजनों का सहारा लिया जा रहा है। पार्टी ने 2024 में दिल्ली की सभी विधानसभा सीटों पर सुंदरकांड पाठ कराने की घोषणा और बाद में अभियान के कथित तौर पर बंद हो जाने का भी जिक्र किया। भाजपा ने सवाल उठाया कि यदि यह धार्मिक आस्था का विषय था, तो उस अभियान को बीच में क्यों रोक दिया गया।

भीड़ को लेकर भाजपा का बड़ा दावा

प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि रोहिणी के जिस पंडाल में आमतौर पर धार्मिक आयोजनों में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहां अरविंद केजरीवाल के निमंत्रण पर आम आदमी पार्टी द्वारा बसों की व्यवस्था किए जाने के बावजूद केवल 500 से 600 लोग ही पहुंचे। उन्होंने कहा, दिल्ली की जनता ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी श्री सुंदरकांड पाठ में शामिल होने के केजरीवाल के निमंत्रण को ठुकरा दिया। इससे उन्होंने केजरीवाल की अवसरवादी भक्ति का समर्थन करने से इनकार कर दिया।

AAP नेताओं की गैरमौजूदगी पर सवाल

दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि केजरीवाल ने इस कार्यक्रम की घोषणा काफी पहले कर दी थी, लेकिन उनकी पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, पूर्व मंत्री गोपाल राय समेत अधिकांश विधायक श्री सुंदरकांड पाठ में शामिल नहीं हुए।

इससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने भी चुनावी समय में केजरीवाल के 'हिंदू अवतार' को स्वीकार नहीं किया। इससे पहले दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने भी आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल चुनाव से ठीक पहले हिंदू मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए हिंदुत्व का सहारा लेते हैं।

हिंदू वोट बैंक की राजनीति का आरोप

तो वहीं मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली और देश की जनता को केजरीवाल का वह बयान आज भी याद है, जिसमें उन्होंने अपनी नानी का हवाला देते हुए कहा था कि वह ऐसे मंदिर में नहीं जाना चाहते, जो उनके अनुसार किसी मस्जिद को तोड़कर बनाया गया हो।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद केजरीवाल ने राजनीतिक लाभ के लिए अचानक हिंदुत्व को अपनाने का प्रयास किया। उस समय आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर साप्ताहिक श्री सुंदरकांड पाठ कराने की घोषणा की थी।

2024 के अभियान का किया जिक्र

मल्होत्रा ने दावा किया कि 16 जनवरी 2024 को करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों में सुंदरकांड पाठ आयोजित किए गए, लेकिन इसके बाद केवल कुछ ही कार्यक्रम हुए और फिर इस अभियान को चुपचाप बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मार्च 2024 में आप सरकार ने 2,600 स्थानों पर एक साथ श्री सुंदरकांड पाठ कराने की घोषणा की थी, लेकिन उनके अनुसार यह आयोजन 26 स्थानों पर भी नहीं हो सका।

सुंदरकांड पाठ पर केजरीवाल को घेरा

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने सवाल किया कि केजरीवाल भगवान हनुमान और श्री सुंदरकांड पाठ के नाम पर "पाखंडी भक्ति" दिखाकर हिंदू आस्था का अपमान कब तक करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि रोहिणी में रविवार को श्री सुंदरकांड पाठ का आयोजन करने वाले केजरीवाल को यह भी बताना चाहिए कि 2024 में जिस श्री सुंदरकांड पाठ शृंखला की उन्होंने घोषणा की थी, उसे बाद में क्यों बंद कर दिया गया।

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