सचिन पायलट-अशोक गहलोत में बढ़ेगी दरार, नए प्रयोग की तैयारी में कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी में एक बड़े संगठानात्मक बदलाव की तैयारी चल रही है। हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में अप्रत्याशित चुनावी नतीजों के बाद पार्टी एक्शन में आ गई है। इसका नमूना बीते दिनों हरियाणा में देखने को मिला...
- Written By: Saurabh Pal
सचिन पायलट, राहुल गांधी, अशोक गहलोत (फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः कांग्रेस पार्टी में एक बड़े संगठानात्मक बदलाव की तैयारी चल रही है। हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में अप्रत्याशित चुनावी नतीजों के बाद पार्टी एक्शन में आ गई है। इसका नमूना बीते दिनों हरियाणा में देखने को मिला। पिछले 13 सालों से गुटबाजी की वजह से बिना संगठन चल रही कांग्रेस पार्टी में जिला इंचार्जों की नियुक्ति की गई।
वहीं अब आलाकमान और संगठन की बीच की सबसे मजबूत कड़ी कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की छुट्टी होने वाली है। इसका कारण महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों का परिणाम है। इसकी दूसरी वजह वेणुगोपाल करीब इस पद पर 5 साल से हैं और उनका रिपोर्टकार्ड भी ठीक नहीं है।
कांग्रेस के पावर सेंटर में जादूगर…, वेणुगोपाल की छुट्टी!
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सूत्रों के मुताबिक संगठन महासचिव के पद के लिए मंथन चल रहा है। इस पद के लिए सबसे उपयुक्त नाम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का है, लेकिन वह गांधी परिवार का विश्वास खो चुके हैं। इसलिए अभी असमंजस की स्थिति बरकरार है। हालांकि इस रेस में गहलोत का नाम अभी भी सबसे आगे है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर ऐसा हुआ तो यह राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के लिए झटका होगा। क्योंकि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सियासी कड़वाहट जग जाहिर है। ऐसे में यदि पावर के सेंटर में गहलोत आते हैं तो निश्चित तौर पर पायलट का प्लेन क्रैश कर सकता है।
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जब कांग्रेस पर चलगा गहलोत का जादू
बता दें कि राजस्थान में 2018 का विधानसभा चुनाव बिना सीएम फेस के लड़ा गया, लेकिन जमीन पर सचिन पायलट के नाम की चर्चा जोरों पर थी। क्योंकि वह प्रदेश अध्यक्ष थे और उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत वाली जीत दर्ज की, लेकिन सियासी परिस्थियां ऐसी बनी की अशोक गहलोत की ताजपोशी हो गई। पायलट को डिप्टी सीएम पद से ही संतोष करना पड़ा।
आलाकमान से बगावत कर गए थे गहलोत
इसके बाद करीब 2 साल सरकार ठीक-ठाक चली। उसके बाद सचिन पायलट फिर कांग्रेस आलाकमान से नेतृत्व परिवर्तन की मांग करने लगे। इसके बाद अंदरूनी कलह आर-पार की लड़ाई में बदल गई। अंत समय में कांग्रेस आलाकमान ने पायलट को राजस्थान की कमान सौंपनी चाही तो गहलोत बगावत पर उतर गए। जिसका नतीजा चुनाव में दिखा। कांग्रेस पार्टी राजस्थान में बुरी तरह हार गई।
राहुल का पायलट से वादा
चुनावी नतीजों के बाद सचिन पायलट को कांग्रेस ने महासचिव पद से नावाजा। इसके साथ प्रियंका गांधी व राहुल गांधी ने वादा किया अगला मुख्यमंत्री पद आपका होगा। इसके बाद से पायलट-कांग्रेस और गहलोत के बीच सीज फायर जारी है।
