प्रेग्नेंसी के लास्ट स्टेज में भी थिरकते रहे पैर, कौन थीं वो महान कलाकार जिनका किरदार निभा रहीं श्रद्धा कपूर?
Who Was Vithabai Narayangaonkar: सिनेमा जगत में अक्सर कुछ ऐसी कहानियों पर काम होता है जो इतिहास के पन्नों में कहीं दब जाती हैं। इन दिनों बॉलीवुड में जगत में एक ऐसी ही अनसुनी और प्रेरणादायक कहानी की गूंज सुनाई दे रही है। एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर बहुत जल्द बड़े पर्दे पर फिल्म 'ईथा' से धमाकेदार एंट्री करने वाली है।
- Written By: यति सिंह
Vithabai Narayangaonkar Story In Hindi: डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर के डायरेक्शन में बन रही फिल्म ईथा की कहानी महाराष्ट्र की फेमस लावणी साम्राज्ञी विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन पर आधारित है। फिल्म ईथा के टीज़र के आने के बाद अब पूरे देश में विठाबाई के असाधारण सफर और उनके कड़ी चुनौतियों को लेकर बातें हो रही हैं।
फिल्म ईथा तमाशा और लावणी कला जगत के उस दौर को दिखाएगी जब कलाकारों को अपनी पहचान के लिए समाज की रूढ़ियों से लड़ना पड़ता था। विठाबाई का नाम तमाशा की दुनिया में बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है जिन्होंने अपनी कला के दम पर दिल्ली सरकार की कुर्सी तक को हिलाकर रख दिया था।
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विठाबाई का जन्म सोलापुर के एक कलाकार परिवार में हुआ था। विठाबाई के पिता भाऊ बापू नारायणगांवकर और मां शांताबाई भी लोक कला से जुड़े थे। इसीलिए विठाबाई की कला के प्रति उनकी दीवानगी इतनी ज्यादा थी कि उनके पिता ने भी उन पर पढ़ाई के लिए कभी कोई दबाव नहीं डाला। सिर्फ 4-5 साल की उम्र में ही उनकी स्कूली शिक्षा हमेशा के लिए छूट गई।
विठाबाई के जीवन का एक ऐसा हिस्सा भी है जो सभी के रोंगटे खड़े कर देता है। साल 1967 में जब उनके तमाशा का पूरा दल शिखर शिंगणापुर में रुका हुआ था, तब विठाबाई पूरी तरीके से गर्भवती थीं। एक कार्यक्रम के दौरान ही उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई। वहां मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने दाई की भूमिका निभाते हुए उनका प्रसव कराया। भारी कमजोरी के बावजूद विठाबाई ने कला के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
विठाबाई का यह तमाशा दल को उस समय के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सामने अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिला। इसके बाद निर्णायक मंडल ने इस दल को प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना। यह तमाशा जगत के पहला मौका था जब किसी दल को देश का सबसे बड़ा सर्वोच्च राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था।
