गुरु नानक जयंती पर देश के इन 10 गुरुद्वारे में टेके मत्था, मिलेगा गुरू नानक देव जी का आशीर्वाद
10 Gurudwara of india: कार्तिक पूर्णिमा के शुक्ल पक्ष की तिथि पर खास और पावन अवसर पर गुरुद्वारे को फूलों से सजाया जाता है और सिख धर्म के पहले गुरु नानक देवजी की पूजा की जाती है।
- Written By: दीपिका पाल
Guru Nanak Jayanti Gurudwara: आज यानि 5 नवंबर को देशभर में गुरुनानक जयंती या गुरु पुरब या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाएगा। कार्तिक पूर्णिमा के शुक्ल पक्ष की तिथि पर खास और पावन अवसर पर गुरुद्वारे को फूलों से सजाया जाता है और सिख धर्म के पहले गुरु नानक देवजी की पूजा की जाती है। हर गुरुद्वारे में इस दिन का खास महत्व होता है। चलिए बात करते है इन देश के 10 गुरुद्वारे की जहां पर लोग अटूट आस्था लेकर आते है।
1. गुरुद्वारा श्री हरमंदिर जी - आप बिहार की राजधानी पटना में इस गुरुद्वारे में दर्शन कर सकते है। पटना में स्थित गुरुद्वारा के निर्माण महाराजा रंजीत सिंह ने करवाया था। गुरुद्वारा श्री हरमंदिर जी सिखों के पांच पवित्र तख्तों में से एक माना जाता है। इस गुरुद्वारे से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यहां सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह का जन्म हुआ था। यहां कि, खासियत है कि, प्रकाश पर्व के मौके पर यहां कीर्तन और पाठ का किया जाता है।
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2. गुरुद्वारा बंगला साहिब- आज दिल्ली के इस गुरुद्वारे में गुरु नानक जयंती पर मत्था टेक सकते है। बड़ी संख्या में यहां पर लोग मत्था टेकने के लिए आते है। बता दें कि, यह गुरुद्वारा हरकृष्ण देव जी के सम्मान में बनाया गया था। गुरुद्वारे के प्रांगण में बने तालाब के पानी को पवित्र माना जाता है।
3. गुरुद्वारा हरमंदिर साहिब सिंह - पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर दुनिया में काफी मशहूर है। कहते है कि, महाराजा रणजीत सिंह जी ने गुरुद्वारे का ऊपरी हिस्सा सोने से ढका था, इसलिए इसे स्वर्ण मंदिर का नाम भी दिया गया है। सिख समुदाय समेत अन्य धर्मों के लोगों की भी इस गुरुद्वारे में अटूट आस्था है।
4.गुरुद्वारा पौंटा साहिब- गुरुनानक जयंती के मौके पर आप हिमाचल प्रदेश के इस गुरुद्वारे में दर्शन कर सकते है। सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह ने सिख धर्म के शास्त्र दसवें ग्रंथ में इस पर एक बड़ा हिस्सा लिखा था। इस गुरुद्वारे को लेकर मान्यता है कि यहां गुरु गोबिंद सिंह चार साल यहां रुके थे।
5. गुरुद्वारा सीसगंज- देश की राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक में आप माथा टेक सकते है। यह गुरुद्वारा 9वीं पातशाही गुरु तेगबहादुर जी से संबंधित है। गुरुद्वारा शीशगंज दिल्ली के नौ ऐतिहासिक गुरुद्वारों में से एक माना जाता है।
6. तख्त श्री दमदमा साहिब- पंजाब के तलवंडी में इस गुरुद्वारे में आप दर्शन कर सकते है। यह पांच तख्तों में से एक मानी जाती है। अन्य चार तख्त हैं अकाल तख्त , तख्त श्री केशगढ़ साहिब , तख्त श्री पटना साहिब और तख्त श्री हजूर साहिब है। इस स्थान पर दसवें सिख गुरु गोबिंद सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब नामक सिख धर्मग्रंथ का पूर्ण संस्करण तैयार किया था।
7. गुरुद्वारा मट्टन साहिब- गुरु नानक जयंती पर कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के अनंतनाग में आप इस गुरुद्वारे में मत्था टेक सकते है।प्राकृतिक रूप से समृद्ध होने के साथ ही ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।माना जाता है कि, श्री गुरुनानक देव जी अपनी यात्रा के दौरान यहां 30 दिन के लिए ठहरे थे। इतना ही नहीं इस जगह पर नानक साहब ने अपने अमृत वचन बोले थे।
8. गुरुद्वारा श्री हेमकुंठ साहिब - यह गुरुद्वारा उत्तराखंड के चमोली में स्थित है। यह दरअसल दसवें सिख गुरु , गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित है और इसका उल्लेख दशम ग्रंथ में मिलता है। कहा जाता है कि, बर्फ पड़ने की वजह से अक्टूबर से लेकर अप्रैल महीने तक गुरुद्वारा श्री हेमकुंठ साहिब बंद रहता है।
9. गुरुद्वारा सेहरा साहिब- गुरु नानक जयंती के मौके पर आप इस गुरुद्वारा में पहुंच सकते है। यह पंजाब के सुल्तानपुर में स्थित है। मान्यता है कि यहां से गुरु हर गोविंद सिंह जी की बारात यहां से गुजरी थी। इसी जगह पर उनकी सेहरा बांधने की रस्म पूरी की गई थी। इसी वजह से इस गुरुद्वारे का नाम सेहरा साहिब रखा गया।
10. श्री हजूर साहिब अब्चालनगर साहिब गुरुद्वारा- महाराष्ट्र के नांदेड़ में स्थित इस गुरुद्वारा में आप मत्था टेक सकते है। यह गुरुद्वारा 5 तख्तों में से एक है जिसका निर्माण महाराज रणजीत सिंह जी ने करवाया था। इस गुरुद्वारे को लेकर मान्यता है कि यहीं पर गुरू गोबिंद सिंह जी ने अपनी आखिरी सांस ली थी।
