कहीं पोंगल तो कहीं लोहड़ी, इन राज्यों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है मकर संक्रांति, जानिए मान्यता
मकर संक्रांति का त्योहार भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद दान करने और खिचड़ी खाने का महत्व है। इस पर्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरे भारत में अलग-अलग नामों से जानते है।
- Written By: दीपिका पाल
Makar Sankranti 2025: साल 2025 की शुरुआत जहां पर हो गई है वहीं पर इस समय जनवरी का महीना चल रहा है। इस महीने में व्रत-त्योहार की शुरुआत हो जाती है इसमें हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का महत्व होता है।इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार को कई राज्यों में अलग-अलग नामों में जाना जाता है। चलिए जानते है इसके बारे में...
उत्तर भारत - यहां पर मकर संक्रांति के नाम से ही जाना जाता है तो वहीं पर कई लोग इसे खिचड़ी भी कहते है। खिचड़ी खाने की परंपरा इन राज्यों में खास होती है।मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन दान करने से पुण्य फल मिलता है, इसलिए इस दिन उड़द की दाल, चावल, तिल, खटाई और ऊनी वस्त्र दान करने की परंपरा है।
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दक्षिण भारत- उत्तर भारत के अलावा मकर संक्रांति का महत्व दक्षिण भारत में भी होता है लेकिन अलग होता है यहां पर इसे पोंगल के नाम से जानते है। यहां पर पोंगल के मौके पर चावल के पकवान और रंगोली बनाने की परंपरा होती है इसके अलावा इस खास दिन को वर्षा, धूप और कृषि से जोड़कर देखा जाता है।
राजस्थान और गुजरात- मकर संक्रांति को इन राज्यों में अलग नाम यानि उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार गुजरात और राजस्थान राज्यों में खास होता है। इतना ही नहीं इस त्योहार में मकर संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने की परंपरा होती है वहीं पर 14 जनवरी को उत्तरायण और 15 जनवरी को वासी-उत्तरायण (बासी उत्तरायण) के रूप में मनाया जाता है।
पंजाब और हरियाणा- इस राज्य में भी मकर संक्रांति को अलग नाम से जाना जाता है यहां पर मकर संक्रांति को लोहड़ी के नाम से जानते है। इस दिन को मनाने के पीछे किसानों और नए फसलों के आने को लेकर अर्थ लगाया जाता है। इस त्योहार के मौके पर शाम के समय सब लोग एक जगह इकठ्ठा होते हैं। आग जलाकर लोग उसके इर्द गिर्द घूमते हैं और पूजा करते हैं। साथ ही इस दौरान भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है।
असम- इस राज्य में मकर संक्रांति को एक अलग नाम माघ बिहू के नाम से जानते है तो कहीं-कहीं पर भोगली बिहू के नाम से जानते है। असम में इस त्योहार को फसल से जोड़कर मनाया जाता है। वहीं पर माघ के महीने में कटाई के मौसम के अंत का प्रतीक है। इस दौरान एक सप्ताह तक दावत होती है। माघ बिहू के दौरान असम में चावल से विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। इस दौरान शुंग पिठा, तिल पिठा आदि और नारियल की कुछ अन्य मिठाइयां बनती हैं।
उत्तराखंड- इस राज्य के कुमाऊं और गढ़वाल में मकर संक्रांति को अलग ढ़ंग से मनाया जाता है। यहां पर दो अलग जगहों में कुमाऊं में जहां इसे घुघुती भी कहते हैं, वहीं गढ़वाल में खिचड़ी संक्रांत कहा जाता है। इस दौरान कुमाऊं में घुघुती बनाई जाती है, जो एक मिठाई होती है। इसे आटे और गुड़ से बनाया जाता है। वहीं गढ़वाली घरों में खिचड़ी भी बनाई जाती है और उसे दान में भी दिया जाता है।
