एक था टाइगर, रीवा नरेश को मिला था यह पहला सफेद बाघ, विश्व बाघ दिवस पर जानें इसके बारे में
दुनिया में बाघों की प्रजातियां खास पाई जाती है जो हमारी एक धरोहर में से एक है। सफेद बाघ का संबंध मध्यप्रदेश के रीवा से है इसकी शुरूआत मोहन टाइगर ने की थी जिसका नाम इतिहास के पन्नों पर दर्ज होता है।
- Written By: दीपिका पाल
दुनियाभर में 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस के रूप में मनाया जाएगा जो हमारे देश की धरोहर बाघों को समर्पित दिन होता है। भारत देश के कई राज्यों में बाघों की संख्या और संरक्षण है वहीं पर मध्यप्रदेश रे रीवा से सफेद बाघ का संबंध पुराना है यहां पर मोहन नामक सफेद बाघ की कहानी आज भी इतिहास के पन्नों पर दर्ज है औऱ याद की जाती है।
दुनिया का सबसे पहला सफेद बाघ ( white tiger ) मध्यप्रदेश के रीवा में पाया गया था और जिसका नाम रखा गया था मोहन। सफेद बाघों को मोहन बाघ के वंशज के रूप में जानते है।
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कहते है रीवा के महाराजा मार्तंड सिंह शिकार के शौकीन थे, जहां पर शिकार के दौरान उन्होंने शेरनी समेत दो शावकों का मार दिया और अपने साथ एक सफेद बाघ ले आए। यह उनके इतना करीब था कि, इसका सरंक्षण करते हुए मोहन नाम रखा गया।
राजा मार्तण्ड सिंह के साथ मोहन फुटबॉल भी खेलता था और रविवार के दिन मांस नहीं खाने का नियम रखता था। वह दूध का सेवन प्राय : करता था।
जानते हैं 1987 में दूरसंचार विभाग के द्वारा एक डाक टिकट जारी किया गया था इस डाक टिकट में मोहन की फोटो थी।
जानते हैं आप रीवा का मुकंदपुर सफारी मोहन की याद में ही सजोया गया है। कहा जाता है कि मोहन ही वो जानवर था जिसका पहली बार बीमा किया गया था। दिल्ली में मोहन का ढाई लाख रुपए का बीमा किया गया था।
