मजबूत डिमांड, रिकॉर्ड टैक्स! दिसंबर में 6.1% बढ़ा GST कलेक्शन; मंदी की आहट के बीच भारत की बड़ी जीत
GST Collection: सरकार ने दिसंबर में 28,980 करोड़ रुपए का जीएसटी रिफंड जारी किया गया है। इसमें सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। इससे नेट जीएसटी कलेक्शन 1.45 लाख करोड़ रुपए हो जाता है
- Written By: मनोज आर्या
जीएसटी ग्रोथ (सौजन्य - सोशल मीडिया)
GST Collection In December 2025: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन दिसंबर 2025 में सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1,74,500 करोड़ रुपए हो गया है। यह पिछले साल समान अवधि में 1,64,556 करोड़ रुपए था। यह जानकारी सरकार की ओर से गुरुवार को दी गई। दिसंबर 2025 में सेंट्रल जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 34,289 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी कलेक्शन 41,368 करोड़ रुपये, आईजीएसटी कलेक्शन बढ़कर 98,894 करोड़ रुपये हो गया है।
इसके अलावा सरकार ने दिसंबर में 28,980 करोड़ रुपए का जीएसटी रिफंड जारी किया गया है। इसमें सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। इससे नेट जीएसटी कलेक्शन 1.45 लाख करोड़ रुपए हो जाता है।
पूरे साल का जीएसटी कलेक्शन?
सरकार ने जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के माध्यम से 4,551 करोड़ रुपए जुटाए, जो संपूर्ण लोन और ब्याज देयता के निपटान तक एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में जारी है। पूरे वर्ष का संग्रह 88,385 करोड़ रुपए रहा, जबकि 2024 में यह 1.1 लाख करोड़ रुपए था। जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर, जो शुरू में जून 2022 तक पांच वर्षों के लिए था, राज्यों को क्षतिपूर्ति के लिए उपयोग किए गए केंद्र सरकार के कोविड-काल के ऋणों की चुकौती के लिए मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था।
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लग्जरी प्रोडक्ट पर 40% का टैक्स
नए जीएसटी ढांचे में क्षतिपूर्ति उपकर को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। लग्जरी वस्तुओं पर 40 प्रतिशत का टैक्स लगाया गया है। वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.6 प्रतिशत बढ़कर 16.5 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 15.19 लाख करोड़ रुपए पर था। इससे पहले नवंबर में जीएसटी संग्रह 1,70,276 करोड़ रुपए पर रहा था। इसमें सालाना आधार पर 0.7 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। पिछले साल समान अवधि में यह 1,69,016 करोड़ रुपए था। वहीं, त्योहारी बिक्री के कारण अक्टूबर में जीएसटी संग्रह 1,95,936 करोड़ रुपए रहा था।
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जीएसटी स्लैब में अहम बदलाव
जीएसटी (GST) स्लैब में बदलाव का मुख्य उद्देश्य टैक्स ढांचे को सरल बनाना और आम आदमी को राहत देना है। हालिया बदलावों के तहत, कई आवश्यक वस्तुओं को 12% और 18% के ऊंचे स्लैब से हटाकर 5% के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे दैनिक उपभोग की चीजें सस्ती होंगी। इन बदलावों का सकारात्मक असर यह हुआ कि मध्यम वर्ग की बचत बढ़ी और बाजार में मांग में तेजी आई।
