दिल चाहता है से लेकर 3 इडियट्स तक, सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, जिंदगी का पाठ भी पढ़ाती हैं ये फिल्में
फ्रेंडशिप डे के मौके पर जानिए बॉलीवुड की उन फिल्मों के बारे में, जिन्होंने दोस्ती के रिश्ते को नए मायने दिए। दिल चाहता है से 3 इडियट्स तक जैसी फिल्मों ने दोस्ती और साथ निभाने का खूबसूरत संदेश दिया।
- Written By: सोनाली झा
Friendship Day Special Films: दोस्ती ऐसा रिश्ता है, जो खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि भरोसे, साथ और समझ से बनता है। बॉलीवुड ने भी समय-समय पर ऐसी कई फिल्में दी हैं, जिन्होंने दोस्ती के अलग-अलग रंग दिखाए। कहीं दोस्तों ने मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ निभाया, तो कहीं उन्होंने जिंदगी जीने का नया नजरिया दिया। फ्रेंडशिप डे के मौके पर जानते हैं उन फिल्मों के बारे में, जिन्होंने दोस्ती के मायनों को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।
‘ये जवानी है दीवानी’ में रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण, आदित्य रॉय कपूर, कल्कि केकलां लीड रोल में थे। इस फिल्म की कहानी भी तीनों दोस्तों की मनाली ट्रिप से शुरू होती है। आगे चलकर कहानी में हीरो शिकागो चला जाता है। वह एक बार फिर अपनी दोस्त की शादी में देश लौटता है।
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‘रंग दे बसंती’ दोस्ती को देशभक्ति और बलिदान से जोड़ते हुए यह संदेश देती है कि सच्चे दोस्त सिर्फ खुशियों में नहीं, बल्कि हर लड़ाई में साथ खड़े रहते हैं।
जोया अख्तर की ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ तीन दोस्तों की स्पेन ट्रिप के बहाने जिंदगी के डर, रिश्तों और अधूरे सपनों को सामने लाती है। ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर और अभय देओल की दोस्ती यह दिखाती है कि सच्चे दोस्त हमें खुद से मिलाने का काम करते हैं।
साल 2001 में रिलीज हुई फरहान अख्तर निर्देशित फिल्म ‘दिल चाहता है’ तीनों दोस्तों आकाश(आमिर खान), समीर(सैफ अली खान) और सिद्धार्थ (अक्षय खन्ना) की जिंदगी के ईद-गिर्द घूमती है। फिल्म की शुरुआत में ये तीनों दोस्त गोवा की ट्रिप पर जाते हैं, इस ट्रिप के दौरान ये खूब एंज्वॉय करते हैं।
वहीं ‘काय पो छे’ तीन दोस्तों के सपनों, संघर्ष और बदलते सामाजिक हालात की कहानी है, जो बताती है कि मुश्किल वक्त में दोस्त ही सबसे बड़ा सहारा बनते हैं।
राजकुमार हिरानी के निर्देशन में बनी ‘3 इडियट्स’ सिर्फ एक इंजीनियरिंग कॉलेज की कहानी नहीं है, बल्कि दोस्ती, सपनों और आत्मविश्वास का संदेश देती है। रणछो, फरहान और राजू की तिकड़ी यह बताती है कि अगर दोस्त सही हों तो मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी आसान हो जाता है। फिल्म का संदेश ‘एक्सीलेंस के पीछे भागो, सफलता खुद आएगी’ आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
इन फिल्मों ने यह साबित किया कि दोस्ती सिर्फ साथ घूमने-फिरने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे को बेहतर इंसान बनाने और हर परिस्थिति में साथ निभाने का वादा है। यही वजह है कि इन फिल्मों की कहानियां और किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं।
