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इस मंदिर में रोजाना बदलता है बूढ़ेश्वर महादेव का स्वरूप, महाशिवरात्रि के दिन बनाएं दर्शन का प्लान

अगर आप भी इस बार कहीं प्राचीन मंदिर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर अच्छा रहेगा। चलिए जानते हैं इसकी खासियत।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Feb 24, 2025 | 12:13 PM
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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाने वाली है इस दिन हर कोई भगवान शिव की आराधना करने के लिए शिव मंदिरों में जाते है। अगर आप भी इस बार कहीं प्राचीन मंदिर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर अच्छा रहेगा। चलिए जानते हैं इसकी खासियत

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यह मंदिर रायपुर महज 65 किमी दूर धमतरी शहर के इतवारी बाजार के पास बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर स्थित है यहां पर महाशिवरात्रि पर भक्तों का हुजूम देखने के लिए मिलता है।

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राज्य के प्राचीन मंदिरों में से एक यह लगभग 13 सौ साल पुराना है जिसका नाम प्रमुख शिव मंदिरों में आता है। वहीं पर इस मंदिर की खासियत है कि, बूढ़ेश्वर महादेव का रोजाना स्वरूप बदलता है. रोजाना पहले विविध रूपों में श्रृंगार किया जाता है।

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बूढ़ेश्वर महादेव का श्रृंगार एक दिव्य और भव्य अनुष्ठान होता है, जिसमें भगवान शिव को विशेष रूप से सजाया जाता है. यह श्रृंगार विभिन्न अवसरों, जैसे महाशिवरात्रि, सावन मास, सोमवार, या किसी विशेष पूजा के दौरान किया जाता है।

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इस मंदिर को लेकर कहते है कि, यह मंदिर रतनपुर के महामाया मंदिर के समकक्ष प्राचीन है. सैकड़ों वर्ष पूर्व कांकेर के राजा के राजघराने में यह मंदिर था। वहीं पर जहां मंदिर स्थित है वहां पर राजा का महल हुआ करता था इसलिए इसे किले को बूढ़ेश्वर मंदिर कहा जाता है।

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प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक और हवन किया जाता है. लगभग दो करोड़ की लागत से इस मंदिर को भव्य रूप देने का कार्य किया गया है।

Budheshwar mahadev temple of chhattisgarh is 1300 years old

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Published On: Feb 24, 2025 | 12:13 PM

Topics:  

  • Chhattisgarh
  • Mahashivratri
  • Mahashivratri 2025

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