सावन में करें भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, हर धाम का अपना है विशेष महत्व
12 Jyotirlingas: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। अगर आप भी सावन में भोलेनाथ के पवित्र धामों के बारे में जानना चाहते हैं, तो देखिए 12 ज्योतिर्लिंगों की खास तस्वीरें।
- Written By: वंदना शर्मा
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इस पूरे महीने श्रद्धालु व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं देश के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के बारे में, जिनका अपना अलग धार्मिक और पौराणिक महत्व है।
गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर माना जाता है। अरब सागर के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इतिहास में कई बार इस मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, लेकिन इसकी आस्था कभी कम नहीं हुई। सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और विशेष पूजा के लिए पहुंचते हैं।
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आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। यह मंदिर घने जंगलों और नल्लमाला पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता का भी अद्भुत उदाहरण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां दर्शन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन में यहां विशेष अनुष्ठान और भव्य आरती का आयोजन किया जाता है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध धामों में से एक है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है, जिसकी अपनी विशेष धार्मिक मान्यता है। यहां होने वाली प्रातःकालीन भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन के दौरान पूरा मंदिर शिवभक्ति के रंग में रंग जाता है।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच स्थित मंडहाता द्वीप पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। कहा जाता है कि यह द्वीप 'ॐ' के आकार का दिखाई देता है, इसलिए इसका नाम ओंकारेश्वर पड़ा। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण इस धाम को और भी खास बनाते हैं। सावन में यहां जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच समुद्र तल से लगभग 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम सबसे कठिन लेकिन सबसे पवित्र शिव धामों में से एक है। यह चारधाम यात्रा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। कठिन यात्रा के बावजूद हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। सावन के महीने में इस धाम का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है तथा यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्राचीन और पूजनीय मंदिरों में से एक है। धार्मिक मान्यता है कि काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन के पूरे महीने मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है और बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है। लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं।
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), वैद्यनाथ (झारखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), नागेश्वर (गुजरात), रामेश्वरम (तमिलनाडु) और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) भी शामिल हैं। इन सभी ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख शिव पुराण में मिलता है और प्रत्येक धाम की अपनी अलग पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता है। सावन के महीने में इन मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों में पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
