हिमंत बिस्वा सरमा (डिजाइन फोटो)
Assam Politics: असम में 2026 के चुनाव की तैयारी हो चुकी है, लेकिन सत्ताधारी खेमे में सीट-शेयरिंग को लेकर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सहयोगी दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि कई चुनाव क्षेत्रों में गठबंधन सहयोगियों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ होने की संभावना बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार विकास के वादों के साथ मैदान में है। जबकि दूसरी ओर उसके सामने अपने सहयोगी दलों, असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को खुश रखने की बड़ी चुनौती है।
साल 2014 से भाजपा की वफादार सहयोगी रही असम गण परिषद इस बार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 2021 के चुनावों में AGP ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से 26 पर अकेले और तीन पर BJP के साथ गठबंधन किया था। पार्टी नौ सीटें जीतने में कामयाब रही। इस बार AGP के जमीनी कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि पार्टी को ज्यादा सीटों पर मौका दिया जाए, जिससे BJP की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि AGP के साथ शुरुआती बातचीत शुरू हो गई है। 9 या 10 मार्च तक सीटों का आखिरी बंटवारा हो सकता है। हालांकि, जब उनसे सहयोगियों की बढ़ती मांगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ किया कि उन्हें किसी भी फॉर्मल मांग के बारे में पता नहीं है, लेकिन उन्होंने ‘फ्रेंडली फाइट’ की संभावना से इनकार नहीं किया।
गठबंधन की सबसे मुश्किल स्थिति बोडोलैंड इलाके में सामने आ रही है। यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने 21 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए अपनी आक्रामक रणनीति की घोषणा की है। इनमें से 15 बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) इलाके में हैं और छह इसके बाहर हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि BPF और UPPL के बीच कड़वाहट कम होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। दोनों पार्टियों ने साफ कर दिया है कि वे न तो साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी और न ही सीट-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमत होंगी। यह स्थिति BJP के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि उसे इन दो क्षेत्रीय ताकतों के बीच बैलेंस बनाना है।
दूसरी ओर सत्ता से बाहर कांग्रेस की लीडरशिप वाला विपक्षी गठबंधन खुद को एक मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है। चार बड़ी विपक्षी पार्टियों ने 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए हाथ मिलाया है और एक जॉइंट कैंपेन शुरू करने का प्लान बनाया है।
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रेसिडेंट गौरव गोगोई ने गठबंधन की एकता पर जोर देते हुए कहा कि सभी सहयोगी जल्द ही पूरे राज्य में मिलकर कैंपेन मीटिंग करेंगे। गोगोई ने कहा कि हमारे पास सिर्फ 30 दिन बचे हैं और ये 30 दिन असम के भविष्य के लिए बहुत जरूरी हैं। हमें एकजुट होकर लोगों तक पहुंचना है।
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विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कितनी जल्दी अपनी सीटों का बंटवारा कर पाते हैं ताकि कैंपेन के आखिरी दिनों में कोई अंदरूनी कलह न हो। जैसे-जैसे नॉमिनेशन की डेडलाइन पास आ रही है, असम की पॉलिटिक्स में गठबंधन धर्म और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच टकराव तेज होता जा रहा है।