इश्क विश्क रिबाउंड मूवी रिव्यू: प्यार और दोस्ती के बीच उलझी ये कहानी करती है बोर, रोहित सराफ का बेहतरीन अभिनय
साल 2003 में आई शाहिद कपूर की फिल्म ‘इश्क विश्क’ की अगली फ्रैंचाइजी ‘इश्क विश्क रीबाउंड’ करीब 20 साल बाद सिनेमाघरों में पेश की गई है। इसे देखने से पहले इसका ये रिव्यू जरूर पढ़ें।
- Written By: आकाश जायसवाल
(Photo Credits: Instagram)
फिल्म: इश्क विश्क रिबाउंड
कास्ट: पश्मीना रोशन, रोहित सराफ, जिब्रान खान, नाएला ग्रेवाल, सुप्रिया पिलगांवकर और शीबा चड्ढा
निर्देशक: निपुण धर्माधिकारी
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रनटाइम: 106. 42 मिनट
रेटिंग्स: 2 स्टार्स
कहानी: साल 2003 में आई शाहिद कपूर की फिल्म ‘इश्क विश्क’ की अगली फ्रैंचाइजी ‘इश्क विश्क रिबाउंड’ करीब 20 साल बाद सिनेमाघरों में पेश की गई है। ये फिल्म कहानी है 4 ऐसे लोगों को जो अपने जीवनसाथी की तलाश में हैं और इस दरम्यान उनकी आपसी दोस्ती में भी इसका काफी प्रभाव पड़ता है। कहानी में दिखाया गया है कि किस प्रकार रोहित सराफ, पश्मीना रोशन और जिब्रान खान का किरदार गहरे दोस्त हैं। बचपन से चली आ रही इस दोस्ती में जहां जिब्रान और पश्मीना एक दूसरे को डेट करने लगते हैं वहीँ रोहित का किरदार अकेला होता है। कॉलेज में उसकी मुलाकात होती है नाएला के किरदार से और ये दोनों भी एक दूसरे को डेट करने लगते हैं। हालांकि ये दोनों ही कपल्स किसी न किसी कारण एक दूसरे से विवाद होने के बाद ब्रेकअप कर लेते हैं। अब क्योंकि रोहित भी पश्मीना के किरदार का बचपन का दोस्त है, वो उसे ब्रेकअप से उबरने में मदद करता है और इस दरम्यान उन्हें प्यार हो जाता है लेकिन इसकी भनक जिब्रान के किरदार को नहीं है। ये कहानी आगे एक ऐसा मोड लेती है जहां प्यार दोस्ती के आड़े आती है लेकिन एक टिपिकल बॉलीवुड फिल्म की तरह इसकी भी हैप्पी एंडिंग होती है।
अभिनय: रोहित सराफ इस फिल्म की जान हैं। जहां उनका स्क्रीन स्पेस सबसे अधिक है वहीँ उनके बेहतरीन काम किया है। फिल्म के साथ डेब्यू करने वाली पश्मीना रोशन ने जहां अपना शत-प्रतिशत देने का प्रयास किया है वहीँ अभी उन्हें अपने एक्सप्रेशंस पर और मेहनत करने की जरुरत है। फिल्म में जिब्रान भी अपने रोल के साथ न्याय करते दिखे। इस कहानी में नाएला का स्क्रीन स्पेस बेहद सीमित है लेकिन उन्होंने एक बेहतरीन अदाकारी का परचिय दिया है। साथ ही फिल्म में सुप्रिया पिलगांवकर और शीबा चड्ढा जैसे मंझे हुए कलाकार हैं जिनके काम की प्रशंसा की जाए उतनी कम है।
म्यूजिक: 2003 की ‘इश्क विश्क’ के सॉन्ग ‘चोट दिल पे लगी’ और ‘इश्क विश्क प्यार व्यार’ को मेकर्स ने इसमें एक नए अंदाज में रीक्रिएट किया है लेकिन इसमें वो बात या कहें भाव नहीं जो इसके ओरिगिओनल वर्जन में हमें महसूस हुआ। मॉडर्न टच के नाम पर गानों ने अपना वो फील खो दिया जिसके चलते ये सुपरहिट हुआ था।
फाइनल टेक: इस फिल्म की कहानी युवाओं को और विशेषरूप से कॉलेज स्टूडेंट्स को आकर्षित करेगी। निर्देशक निपुण धर्माधिकारी ने एक मॉडर्न डे लव स्टोरी पेश करने की कोशिश की है लेकिन ये कई जगहों पर उलझी हुई नजर आती है। 1 घंटे 46 मिनट की ये सबसे छोटी लव स्टोरी फिल्म में जिसमें हर सीन हर मोड बेहद आसानी से और जल्दबाजी से पेश किया है जिसके चलते ये कहानी अपने असली भाव को खो देती है। फिल्म में कलाकारों के प्रदर्शन ने जहां इसे एंटरटेनिंग बनाने का प्रयास किया है वहीं इसकी कहानी बेहद उलझी हुई नजर आती है और कई जगहों पर बोरियत का अहसास कराती है। ये फिल्म कम और किसी टीवी रियलिटी शो का फील अधिक देती है। ऐसे में नवभारत इसे 2 स्टार्स की रेटिंग के साथ एवरेज फिल्म करार देता है।
