बर्थ एनिवर्सरी: लता मंगेशकर को पतली आवाज की वजह से कर दिया था रिजेक्ट, जानें फिर कैसे बनीं सुरों की मल्लिका
लता मंगेशकर की 28 सितंबर यानी आज बर्थ एनिवर्सरी हैं। गायिका का जन्म 28 सितंबर, 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। लता की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। लता ने अपने भाई-बहन को पालने के लिए शादी तक नहीं की थी।
- Written By: सोनाली झा
मुंबई: सुरों की मल्लिका कही जाने वाली मशहूर गायिका लता मंगेशकर को भला कौन भूल सकता है। लता मंगेशकर बेशक आज हम सब के बीच नहीं है, लेकिन अपने शानदार गीतों के लिए तला फैंस के दिलों में राज करती हैं। लता मंगेशकर की 28 सितंबर यानी आज बर्थ एनिवर्सरी हैं। गायिका का जन्म 28 सितंबर, 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। लता की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। लता ने अपने भाई-बहन को पालने के लिए शादी तक नहीं की।
लता मंगेशकर सिंगर बनने से पहले एक्टिंग में भी अपने हुनर का जादू बिखेर चुकी हैं। हालांकि गायिका की किसी भी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। बताया जाता है कि लता जी ने 8 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। लता ने करीब 50 हजार से ज्यादा गाने आए है। उन्होंने करीब 36 अलग अलग भाषाओं में गाना गया है। लता ने भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड जिसे कई अवॉर्ड अपने नाम किया है।
लता मंगेशकर की फिल्में
लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने मराठी फिल्मों में एक्टिंग की थी। ‘किती हासिल’ नाम की मराठी फिल्म में उन्होंने मराठी गीत भी गाया था। हालांकि गीत को फिल्म में शामिल नहीं किया गया, लेकिन गायकी का उनका सफर वहीं से शुरू हुआ। लेकिन लता इस फिल्म के बाद भी काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा।
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पतली आवाज के कारण मिला था रिजेक्शन
लता मंगेशकर को एक्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्हें बचपन से ही गाने का शौक था। वह 5 साल की उम्र से गाना गा रही थी। लेकिन उस समय कोई उन्हें गाने का काम देने को तैयार नहीं था। दरअसल, उनकी पतली आवाज और उर्दू उच्चारण के कारण संगीतकार उन पर भरोसा करने को तैयार नहीं थे।
इस तरह बनीं सुरों की मल्लिका
ऐसे में मास्टर गुलाम हैदर ने उनपर भरोसा जताया। उन्होंने लता जी की सिफारिश उस जमाने के मशहूर निर्देशक शशधर मुखर्जी से की, लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। इस रिजेक्शन को हैदर ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। उन्होंने कमाल अमरोही की फिल्म ‘महल’ के गाने लता जी से गवाए जो काफी सफल रहे। इसके साथ ही लता जी सुरों की मल्लिका बन गईं।
इन गानों ने छू लिया लोगों का दिल
किसे पता था कि फिल्म ‘महल’ से अपने गायकी का सफर शुरू करने वाली लता की आवाज एक दिन देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में गूंजेगी। लता मंगेशकर ने भीगी-भीगी रातों में, लग जा गले, अजीब दास्तां है ये, तेरा बिना जिंदगी से, तुम आ गए हो नूर आ गया है, तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, एक प्यार का नगमा है समेत हजारों गानों में अपनी सुरीली आवाज का जादू ऐसा बिखेरा कि आज भी हर पीढ़ी के लोग लता के गाने गुनगुनाते नजर आते हैं।
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