अमजद अली खान ने 12 साल के उम्र में दी थी पहली प्रस्तुति, पद्म विभूषण से हो चुके हैं सम्मानित
बॉलीवुड के प्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खान का जन्म 9 अक्टूबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। अमजद अली खान आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं। अमजद अली खान एक प्रसिद्ध सरोद वादक हैं जिनको भारत सरकार द्वारा सन साल 1991 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
- Written By: सोनाली झा
अमजद अली खान (फोटो क्रेडिट-सोशल मीडिया)
मुंबई: बॉलीवुड के प्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खान का जन्म 9 अक्टूबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। अमजद अली खान आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं। अमजद अली खान एक प्रसिद्ध सरोद वादक हैं जिनको भारत सरकार द्वारा सन साल 1991 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनके पिता उस्ताद हाफ़िज अली खान ग्वालियर राज-दरबार में प्रतिष्ठित संगीतज्ञ थे।
अमजद ने करीब 12 साल की उम्र में एकल सरोद-वादन का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन प्रस्तुत किया था। एक छोटे से बालक की सरोद पर अनूठी लयकारी और तंत्रकारी सुन कर दिग्गज संगीतज्ञ दंग रह गए। अमजद ने अपने पिता के ही शिष्य थे, जिन्होंने सेनिया घराना सरोद वादन में परंपरागत तरीके से तकनीकी दक्षता हासिल की थी।
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अमजद अली ने शास्त्रीय संगीत में अभिनव परिवर्तन के अलावा बच्चों के लिए गायन और वाद्य संगीत की रचना की। ग्वालियर में जन्में अमजद अली खान ने भरतनाट्यम नृत्यांगना शुभालक्ष्मी के साथ शादी की। अमजद की सर्जनात्मक प्रतिभा को उनके द्वारा बनाई कई मनमोहक रागों में अभिव्यक्ति मिली। उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की स्मृति में क्रमश: राग प्रियदर्शनी और राग कमलश्री की रचना की। उनके द्वारा रचित अन्य रागों में शिवांजली, हरिप्रिया कानदा, किरण रंजनी, सुहाग भैरव, ललित ध्वनि, श्याम श्री और जवाहर मंजरी शामिल हैं।
अमजद अली के जिंदगी में काफी उतार चढ़ाव आया था। अमजद अली के लाइफ में एक समय ऐसा आया था कि उन्हें अपने घर से बेघर होना पड़ा था। साल 1963 में मात्र 18 साल की उम्र में अमजद अली ने पहली अमेरिका यात्रा की थी। इस यात्रा में पण्डित बिरजू महाराज के नृत्य-दल की प्रस्तुति के साथ अमजद अली खाँ का सरोद-वादन भी हुआ था।
अमजद अली ने साल 1971 में द्वितीय एशियाई अन्तर्राष्ट्रीय संगीत-सम्मेलन में भाग लिया था। इस सम्मेलन में उन्हें रोस्टम पुरस्कार मिला था। अमजद अली को यूनेस्को पुरस्कार, 1975 में पद्मश्री, कला रत्न पुरस्कार, 1989 तानसेन सम्मान, 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1991 में पद्म भूषण और 2001 में पद्म विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया हैं।
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