प्रतीकात्मक ईमेज (सोर्स-नवभारत डिजाइन)
DMK KMDK Seat Sharing: द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने शुक्रवार को आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने क्षेत्रीय सहयोगी कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची (केएमडीके) के साथ सीट बंटवारे के समझौते को औपचारिक रूप दे दिया। समझौते के तहत केएमडीके को दो विधानसभा सीटें दी गई हैं।
यह समझौता चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में एम.के. स्टालिन और केएमडीके के महासचिव ई.आर. ईश्वरन की मौजूदगी में हुआ। समझौते के अनुसार, केएमडीके के उम्मीदवार डीएमके के प्रतिष्ठित ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। सीट बंटवारे की बातचीत पूरी होने और गठबंधन की पुष्टि के बाद स्टालिन अन्ना अरिवालयम से रवाना हो गए।
गौरतलब है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और उसके प्रमुख सहयोगी दल कांग्रेस के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। कांग्रेस ने हालिया स्थानीय और राष्ट्रीय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का हवाला देते हुए कम से कम 35 सीटों की मांग की है। डीएमके नेतृत्व 234 सदस्यीय विधानसभा में स्पष्ट बहुमत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 180 सीटों पर खुद चुनाव लड़ने के पक्ष में है। इसी वजह से दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस को 2021 विधानसभा चुनाव की तरह 25 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस ने राज्य मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी की मांग उठाई है। पार्टी नेता मणिकम टैगोर का कहना है कि गठबंधन में सत्ता साझा करना समय की जरूरत है। वहीं डीएमके ने साफ किया है कि वह अपनी पारंपरिक ‘एक-दलीय शासन’ की नीति पर कायम है और द्रविड़ मॉडल में नेतृत्व की मुख्य भूमिका डीएमके की ही रहेगी।
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तमिलनाडु चुनाव से पहले कांग्रेस और डीएमके के बीच का यह संघर्ष कहीं ना कहीं यह सवाल पैदा कर रहा है कि कांग्रेस राज्य में अकेली पड़ सकती है। अगर सीट वांटवारे को लेकर बात नहीं बनी तो कांग्रेस में कुछ नेताओं का समूह ऐसा है जिन्हें ज्यादा सीट चाहिएं और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह इस गठबंधन को तोड़ने के पक्ष में हैं। इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स यह दावा कर रही हैं कि 2 मार्च की रात कांग्रेस और डीएमके के बीच सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच गया था। कांग्रेस 36 सीटों की मांग पर अड़ी थी, जबकि डीएमके 25 से आगे बढ़ने को तैयार नहीं थी। हालांकि बाद में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओ ने मामला संभाल लिया था।