Year Ender 2024: फडणवीस, शिंदे के मना करने के बावजूद पवार ने इस नेता को दिया टिकट, आखिर जनता को ही देनी पड़ी पटकनी
महाराष्ट्र की जनता ने इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में काफी सख्त एक्शन लिया है। इस बार जनता ने उस नेता को पटकनी दे दी, जिसे महायुति के दिग्गज नेताओं ने भी टिकट देने से मना कर दिया था और आखिर बड़ी हार झेलनी पड़ी।
- Written By: प्रिया जैस
नवाब मलिक (सौजन्य-सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: 2024 ये एक ऐसा साल रहा है, जिसने देश की क्या महाराष्ट्र की राजनीति में कई नेताओं की जिंदगी बदल दी। किसी राजनेताओं ने जीत का ताज पहना तो किसी ने हार की निराशा झेली। ऐसा ही एक नेता है, जिन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना किया।
वैसे देखा जाए तो इस नेता के लिए महायुति गठबंधन ने पहले ही इंकार कर दिया। महायुति से देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे ने पहले ही इस नेता की उम्मीदवारी पर आपत्ति जताई थी और उनके लिए प्रचार करने से भी मना कर दिया था, लेकिन फिर भी एनसीपी के नेता अजित पवार ने उन्हें अपनी पार्टी से उम्मीदवारी दी थी।
अब तो आप समझ ही गए होगे कि हम किस राजनेता की बात कर रहे है, जिन्हें महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पटकनी मिली है। हम मानखुर्द शिवाजी नगर सीट से अबू आसिम आजमी के खिलाफ चुनाव में खड़े हुए नवाब मलिक की बात कर रहे है।
सम्बंधित ख़बरें
बारामती उपचुनाव में लोकतंत्र का उत्सव, पवार परिवार ने किया मतदान; अजीत पवार को श्रद्धांजलि संग वोटिंग की अपील
नवाब मलिक का हाथ नहीं! समीर वानखेड़े मामले में NCB का बड़ा यू-टर्न, बताया आखिर किसके कहने पर हो रही है जांच?
औरंगाबाद पश्चिम चुनाव याचिका खारिज; उबाठा के राजू शिंदे को हाईकोर्ट से झटका, संजय शिरसाट की जीत बरकरार
चुनाव प्रचार के आखिरी दिन नवाब मलिक का राज ठाकरे पर बड़ा हमला, बोले- नफरत की राजनीति कर रही MNS और भाजपा
अजित पवार ने दिया टिकट
इस बार दोनों के बीच खुद को मुसलमानों का बड़ा चेहरा साबित करने की जंग छिड़ी हुई थी। भले ही महायुति ने राज्य में कई सीटों पर कब्जा किया लेकिन मानखुर्द सीट पर समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता अबु आसिम आजमी ने जंग जीत ली और एनसीपी (अजित पवार) के सीनियर नेता नवाब मलिक को शिकस्त दी।
ये कह सकते है कि मानखुर्द सीट की जनता ने अपने लिए एक ऐसे नेता का चुनाव किया जिसका आपराधिक गतिविधियों में नाम न आया हो। आपको बताते चलें कि नवाब मलिक का कुछ समय आपराधिक गतिविधियों में कई बार नाम आ चुका है। इस समय वे जमानत पर जेल से बाहर है।
अबू आजमी का चौका
इस बार सपा से अबू आसिम आजमी और एनसीपी अजित पवार की पार्टी से नवाब मलिक महाराष्ट्र विधानसभा की मानखुर्द शिवाजी नगर सीट से आमने-सामने थे। इस सीट पर अबू आजमी तीन बार विधायक रह चुके हैं और उन्होंने इस बार भी जीत कर चौका लगाया है। उनके खिलाफ खड़े नवाब मलिक दूसरे क्या तीसरे नंबर तक भी नहीं पहुंच पाए।
महाराष्ट्र से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
मुसलमानों के वोट के लिए दिया टिकट
इस चुनावी जंग में नवाब मलिक ने नामांकन दाखिल करने के बाद कहा था कि मैंने तय किया था अगर मुझे मेरी पार्टी इस सीट से टिकट नहीं देती तो मैं निर्दलीय चुनाव लड़ूंगा लेकिन आखिरी मौके पर पार्टी मुझे मानखुर्द-शिवाजी नगर विधानसभा सीट से टिकट दे दिया।
एनसीपी (अजित पवार) ने नवाब मलिक को इस सीट से टिकट के देने के पीछे कई कारण बताए थे। अजित पवार ने नवाब मलिक को पार्टी के टॉप-5 नेताओं में से एक बताया था। साथ ही उन्हें मुस्लिम समुदाय में एक बड़ा चेहरा बताया था और कहा था कि उनका समर्थन खोने से पार्टी को लोकसभा चुनाव के दौरान काफी नुकसान हुआ था। उनको साथ लेकर अजित पवार मुस्लिम समुदाय के वोट अपनी ओर खींचना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
जनता ने लिया फैसला
जनता ने पार्टी से ज्यादा चुनाव में नेता का करियर देखा और ये देखा कि आपराधिक मामलों में फसने के बावजूद वे कैसे नेता बन सकते है। जनता ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपने लिए साफ नेता का चुनाव किया और नवाब मलिक को नकार दिया।
जब नतीजे आए तो पासा पलटता नजर आया। मानखुर्द विधानसभा सीट से अबू आसिम आजमी को 54780 वोट मिले, AIMIM के अतीक अहमद खान 42027 वोटों के साथ दूसरे नंबर, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के उम्मीदवार 35263 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे और नवाब मलित सबसे पीछे चौथे नंबर पर 15501 वोटों के साथ नवाब मलिक रह गए।
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में शामिल नवाब मलिक
आपको बता दें कि नवाब मलिक पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे। ईडी ने नवाब मलिक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि नवाब मलिक ने अवैध रूप से संपत्ति जमा की है। इसके बाद नवाब मलिक को कोर्ट में पेश होना पड़ा और वे कुछ समय जेल में भी रहे। इतना ही नहीं बल्कि नवाब मलिक पर दाऊद इब्राहिम जैसे अपराधियों से संबंध होने का भी आरोप है। यह आरोप उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा लगाया गया है, जिसका इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बड़ा असर देखने को मिला है।
